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धर्मनगरी में कला-संस्कृति का संगम

कुरुक्षेत्र :वर्ष 2018 में धर्मनगरी में कला-संस्कृति का संगम हुआ। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव से लेकर रत्नावली महोत्सव एवं अखिल भारतीय कला साधक संगम में कलाकारों ने अपने प्रदेश की संस्कृति को प्रदर्शित किया। अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली से लेकर कर्मस्थली का मिलन ब्रह्मसरोवर के तट पर हुआ तो पर्यटक मॉरीशस की ¨हदू संस्कृति से भी परिचित हुए।

वर्ष भर में जिले में तीन सबसे बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। संस्कार भारती द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कला साधक कार्यक्रम देश के 22 प्रांतों के तीन हजार कलाकार एक दूसरे की संस्कृति से रूबरू हुए। धर्मनगरी में हर तरफ कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी के कलाकारों का संगम दिखाई दिया। गीता जयंती को छोड़ दें तो धर्मनगरी में इस तरह का पहला कार्यक्रम था, जिसमें गीता नगरी में मिले स्वागत व सम्मान से कलाकार भी अभिभूत नजर आए। कलाकारों द्वारा पूरे शहर को रंग-बिरंगी रंगोली से सजाया गया था। तीन दिन तक चले कार्यक्रम में संस्कृति एवं लोक परिधानों में सजे कलाकारों ने नृत्य, कला, संगीत एवं साहित्य के रंग बिखेरे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में लोक कला की विरासत झलकी तो कलाकार उत्साहित एवं उमंग से प्रेरित दिखाई दिए।

-देश विदेश के कोने-कोने से पहुंचे पर्यटक

अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में देश और विदेश के कोने-कोने से 28 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। 14 दिन चले अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में पर्यटकों को शिल्प, सरस व लोक कला के दर्शन हुए। ब्रह्मसरोवर के बीच पानी के पर्दे पर लाइट एंड साउंड शो व 48 कोस की डिजिटल गैलरी दो बड़े प्रोजेक्ट ने पर्यटकों को आकर्षित किया। वहीं हरियाणवी पवेलियन में पांडव रसोई और लोक कलाकारों ने इस बार लोगों का खूब ध्यान खींचा तथा चार लाख लोगों के दिल पर छा गए। पहली बार उत्तर प्रदेश राज्य व मॉरीशस देश को पार्टनर बनाया गया। क्राफ्ट मेले में 250 कलाकार पहुंचे, जिनमें 50 राष्ट्रीय स्तर के शिल्पकार और स्टेट अवार्डी शामिल हैं। देश भर के 22 राज्यों से कलाकार अपनी-अपनी कला लेकर आए, जिसे कई कद्रदान मिले। इसके अलावा 250 ही स्वयं सहायता समूह ने सरस मेले में बनाए गए उत्पाद बेचे। वहीं 12 राज्यों के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर लोगों का मन मोहा।

- 32 विधाओं में 3700 कलाकार दिखाई प्रतिभा

रत्नावली महोत्सव में हरिणयावी संस्कृति के साथ देश के हर कोने की संस्कृति का संगम दिखाई दिया। रत्नावली महोत्सव में फॉक ट्राइबल एवं फॉक आर्केस्ट्रा विधा आकर्षण का केंद्र रही। पांच दिवसीय रत्नावली महोत्सव में 32 विधाओं में 3700 कलाकारों ने छह मंचों पर धमाल मचाया। रत्नावली के 33 वर्षों के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि दूसरे राज्यों के कलाकार ने भी रत्नावली महोत्सव में अपनी प्रस्तुतियां दी। रत्नावली महोत्सव में हरियाणवी स्टार नाईट, पॉप सांग हरियाणवी, सोलो डांस, सांग प्रतियोगिता, रागिनी प्रतियोगिता, ग्रुप सांग हरियाणवी, फॉक कास्ट्यूम जैसी प्रतियोगिताएं विशेष आकर्षण का केंद्र रही।