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विदेशियों को 5 हजार करोड़ दिए, देश के किसानों को देकर दिखाएं प्रधानमंत्री: मलिक

 

हिसार.देश में केवल सात प्रतिशत किसानों की फसलें ही सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिक पाती हैं। बाकी किसानों को केवल आढ़तियों के भरोसे ही रहना पड़ता है। सरकारी खरीद एजेंसियों और आढ़तियों के बीच सेटिंग के चलते फसलों की खरीद काफी देरी से शुरू होती है। प्रधानमंत्री अपने विदेशी दौरों के दौरान वहां 5 हजार करोड़ रुपए देकर आए हैं। यहां के किसानों को भी देकर दिखाएं।


यह बात बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर आयोजित किसान दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने कहा कि भारत के किसान अनुकूल नीतियां न होने के कारण पिछड़े हैं। 7-8 साल पहले कानून बना था कि देश का किसान कहीं भी जाकर अपनी फसल बेच सकता है लेकिन आज तक ऐसा नहीं है।

चौधरी चरण सिंह थे किसानों की आवाज उठाने वाले पहले नेता

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि चौधरी चरण सिंह के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही किसानों को लेकर नीतियां बननी शुरू हुईं। वो एक मात्र ऐसे पहले नेता थे जिन्होंने संसद में किसानों की आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि आज किसान को अपनी जरूरत की चीजें खरीदने के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, जबकि फसल का उसे कम भाव मिल रहा है।

किसानों की आबादी 70 फीसदी बजट में हिस्सा 30 फीसदी: गुर्जर
विधानसभा अध्यक्ष कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि किसान की आबादी 70% है जबकि बजट 30% है। वर्तमान सरकार चौधरी चरण सिंह के मार्ग पर चलते हुए किसानों की सहायता कर रही है। खराब हुई गत तीन सालों की फसल के खराबे के रूप में 2400 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया।