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गोवंश पर संकट बरकरार, मृतकों की संख्या 388 के पार

 

बेसहारा गोवंश के लिए जिला प्रशासन ने अंबाला शहर में सुल्लर नंदीगोशाला और मुलाना में टंगैल गोशाला बना दी, लेकिन दोनों गोशाला अब तक गोवंश के लिए कालगृह ही साबित हुई हैं। सुल्लर नंदीगोशाला में पशुपालन विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद 160 से ज्यादा गोवंश की मौत हो चुकी हैं वहीं टंगैल गोशाला में यह आंकड़ा 228 के पार जा चुका है। अलबत्ता, गोवंश पर मौत की मार अभी भी बरकरार है। टंगैल नंदीगोशाला में जहां गोवंश के लिए दो शेड बने हुए हैं और तीसरे शेड का निर्माण तेजी पर है, वहीं सुल्लर में गोवंश को केवल एक ही शेड का सहारा है। इसी में करीब 200 गोवंश को रात के समय ठूंस दिया जाता है हालांकि इसकी क्षमता 120 की है। वहीं 150 गोवंश हाड़तोड़ ठंड में खुले आसमान तले रात काट रहे हैं।ल्लर नंदीगोशाला के लिए अगस्त माह में शहरी विधायक असीम गोयल ने 11 लाख रुपये नया शेड बनाने के लिए देने की घोषणा करते हुए ग्रांट भी जारी करा दी, लेकिन आज तक शेड नहीं बन पाया। इसके बाद नवंबर माह में शिक्षा मंत्री ने नंदीगोशाला का निरीक्षण किया। लापरवाही पर बीडीपीओ और एक डॉक्टर को सस्पेंड करते हुए शेड बनाने के लिए 11 लाख की घोषणा 27 नवंबर को की थी, लेकिन न तो यह ग्रांट आई न ही शेड का निर्माण शुरू हुआ।

नगर निगम ने 20 लाख में किए थे जारी

टंगैल गोशाला की बात करें तो यहां पर नगर निगम ने 20 लाख की राशि जारी की थी। इसमें चार शेड और चाहरदीवारी बनाने का वादा किया गया था लेकिन इसमें महज एक शेड व चाहरदीवारी ही बन पाई। ब्लॉक समिति की सदस्य मोनिका ने निजी कोष से 3 लाख रुपये देकर एक शेड बनवा दिया। एडीएम ने दो लाख रुपये दिलाने की घोषणा की थी उससे भी शेड बन जाएगा। मुलाना विधायक संतोष सारवान तीन लाख और सांसद रतन लाल कटारिया 20 लाख व मंत्री नायब सैनी पांच लाख घोषणा कर चुके हैं। हालांकि यह राशि कब तक आएगी यह तो अतीत की तय करेगा।

हाईकोर्ट भी मांग चुकी ही रिपोर्ट

प्रदेशभर में गोशालाओं की क्या स्थिति है, उनमें कितने कर्मचारी हैं और कितने पशु सारी रिपोर्ट सरकार से मांगी गई है। हाईकोर्ट इस मामले को लेकर काफी सख्त है लेकिन अधिकारियों को इस बात की कोई परवाह नहीं है।

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