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स्वास्थ्य सुधरा जरूर, लेकिन ज्यादा नहीं

कुरुक्षेत्र :स्वास्थ्य विभाग का स्वास्थ्य इस साल कुछ सुधरा जरूर है, लेकिन ज्यादा नहीं। वर्ष 2016 में दो शवों को कुतरने के बाद चूहों ने प्रसूति विभाग में उत्पात मचाया और एक तीमारदार को काट लिया। इसके अलावा सही समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने का मामला भी उठा। महानिदेशक डॉ. सतीश अग्रवाल द्वारा एलएनजेपी अस्पताल के औचक निरीक्षण में भी अस्पताल प्रशासन की खूब किरकिरी हुई और स्वयं नाली में हाथ डालकर गंदगी की सफाई करके अधिकारियों को स्वच्छता को संदेश देना पड़ा। इसके बाद एनएचएम कर्मियों की हड़ताल के बाद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं भी दस दिन तक प्रभावित रहीं।

सारा साल स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियों पर नजर डालें तो वर्ष 2016 के मुकाबले 2017 ठीक रहा, लेकिन फिर भी इसे ज्यादा अच्छा नहीं माना जा सकता। वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2017 में कम ही विवाद रहे, लेकिन कई ऐसे मामले आए जिसमें स्वास्थ्य विभाग की खूब किरकिरी हुई। दो चिकित्सकों की आपसी खींचतान मरीजों के इलाज में रोड़ा बन गई। विभाग के लाख प्रयास के दावे भी डेंगू के सामने धराशाई हो गए। वर्ष 2016 में जहां डेंगू ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था इस वर्ष पिछले वर्ष का भी रिकॉर्ड टूट गया और एक युवक समेत नगर परिषद के उपाध्यक्ष की मौत हो गई। वहीं प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत अभी भी खस्ताहाल है। कहीं विभाग के पास अपनी इमारत नहीं है तो कहीं बिजली और चिकित्सक कम हैं।

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एलएनजेपी अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में शवों को कुतरने वाले चूहे अस्पताल प्रशासन के लिए सिरदर्द बने रहे। चूहों ने इस बार किसी शव को नहीं बल्कि प्रसूति केंद्र में दाखिल गर्भवती महिला की देखरेख के लिए आई एक तीमारदार महिला के हाथ पर काट लिया। जबकि इससे पहले वर्ष 2016 में यही चूहे शवों को कुतर चुके हैं।

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ज्योतिसर में नहीं अपनी इमारत

ज्योतिसर गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की इमारत जर्जर हो चुकी है, जिसके बाद स्वास्थ्य केंद्र पंचायत द्वारा दिए गए एक उधार के कमरे में चल रहा है। गीता के साक्षी वट वृक्ष को देखने के लिए लाखों की तादाद में देश विदेश से लोग ज्योतिसर में पहुंचते हैं। जहां कभी भी किसी को प्राथमिक चिकित्सा की जरूरत पड़ सकती है। मगर फिर भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को ऐसी जगह बनाया गया है जहां लोग अपने पशु बांध देते हैं।

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आपातकालीन समय में केवल रेफर की सुविधा

इस्माईलाबाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन समय में केवल रेफर की सुविधा है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्र गांव में सबसे निचले क्षेत्र में बना है। ऐसे में जब बारिश होती है तो गांव का सारा गंदा पानी स्वास्थ्य केंद्र की इमारत के चारों ओर एकत्रित हो जाता है और चिकित्सक को दूसरी जगह पर मरीजों को देखना पड़ता है। कहने को यहां डिलीवरी हट बनाई गई है, जिसे न तो हॉटलाइन से जोड़ा गया है और न ही यहां बिजली की कोई अतिरिक्त व्यवस्था है। यहां गर्भवती महिलाओं को बिजली नहीं होने की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को मोबाइल की रोशनी में दाखिल करना पड़ता है या फिर रेफर।