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न तो दो सौ बेड का अस्पताल बना, न ही भरे चिकित्सकों के रिक्त पद

यमुनानगर : जनता की सेहत खतरे में है। सरकार पूरे साल अस्पताल में चिकित्सकों की नियुक्ति कराने में नाकाम रही है। इसका फायदा निजी अस्पताल संचालक उठा रहे हैं और मोटी कमाई कर रहे हैं। हालांकि विभाग ने मरीजों की सुविधा के लिए ट्रॉमा सेंटर में ऑपरेशन थिएटर और सिटी स्केन केयर शुरू कराया है। 30 नई नियुक्तियों में से मात्र छह चिकित्सकों ने कार्यभार संभाला है। उधर, एनएचएम कर्मचारियों ने अपनी मांगें पूरी कराने के लिए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिससे लोगों को परेशानी हुई थी।

1 नवंबर, 2015 को सीएम मनोहर लाल यमुनानगर में विकास रैली में आए थे। तब उन्होंने मंच से घोषणा की थी कि जिले के लोगों को अब स्वास्थ्य लाभ के लिए निजी अस्पताल में नहीं जाना पड़ेगा। जिला अस्पताल को दो सौ बेड का किया जाएगा। सीएम घोषणा भी न तो स्थानीय विधायक पूरी करा पाए न ही विभाग। अब हालात ऐसे हैं एक-एक बेड पर दो मरीजों को लेटना पड़ता है या फिर मरीज को घर से बेड लाना पड़ता है। विभाग के अधिकारी कहते हैं ड्राइंग पूरी हो गई है, जल्द ही काम शुरू होगा इसमें दो साल निकल गए।

सामुदायिक और प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र तो दूर जिला अस्पतालों में डॉक्टरों की कुर्सियां खाली हैं। अस्पतालों में मरीजों का मर्ज और भी बढ़ रहा है। विभाग में कुल 90 में से 45 मेडिकल ऑफिसर के पद रिक्त पड़े हैं। न केवल अस्पतालों में आने वाले मरीजों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है, बल्कि विभाग की ओर चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं