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मन रूपी ताकतवर हाथी को साध सकता है सतगुरु रूपी महावत

झज्जर : इंसान बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान कर सकता है। बड़े से बड़े संकट को काट सकता है । लेकिन मन को वश में करना उसके लिए सम्भव नहीं है। मन के उद्गार इतने प्रबल है कि इंसान इनसे बच नहीं सकता। मन रूपी ताकतवर हाथी को सतगुरु रूपी महावत ही साध सकता है। यह सत्संग राधास्वामी परमसंत सतगुरु कंवर साहेब महाराज ने झज्जर शहर के नजदीक एक निजी कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान किया।

गुरु महाराज ने फरमाया कि मन पर अंकुश केवल शब्द के भेदी सतगुरु ही लगा सकते है क्योंकि शब्द ही सृष्टि का रचयिता है। सात द्वीप नौ खंड पृथ्वी आकाश समुद्र सब शब्द की रचना है। इसलिए शब्द का भेदी ही रचना को बखूबी समझ सकता है। इंसान को शब्द भेदी गुरु की खोज करनी चाहिये। ताकि गुरु के शब्द बाण से हमारी भ्रम की दुनिया ढह सके। उन्होंने गुरु वचन की महिमा का सार सत्संग को बताया।

हु•ाूर कंवर साहेब ने फरमाया कि मुख्य रूप से हम तीन इंद्रियों से ही शक्ति का क्षरण करते हैं। मुख से, आंख से और कान से। अगर हमने इनको साध लिया तो हम अपनी शक्ति का संचय तो कर ही लेंगे साथ ही साथ जगत को भी जीत लेंगे। मुख से बुरा मत बोलो, कान से बुरा मत सुनो और आंख से बुरा मत देखो।सारा संसार आपको अच्छा लगेगा और आप जगत को।संत महात्मा भी अंतर में चढ़ाई करने के लिए ये तीन बंद ही बताते हैं।इंसान का ¨पड का रूप ही ब्रह्मांड है।¨पडे सो ब्रह्मांडे। फिर भी इंसान अपने महत्व को नहीं जानता। गुरु महाराज ने कहा कि इस सृष्टि में 9 लाख जल के जीव हैं 10लाख पखेरू हैं 11 लाख कीट पतंगे हैं,बीस लाख स्थावर जीव है और 4 लाख इंसानी योनि है परंतु उसमे श्रेष्ठ केवल वो है जो परमात्मा का भजन करता है।परमात्मा के भजन का ज्ञान केवल इंसान के पास है।परंतु विडंबना यह है कि इंसान अपने इस अनमोल जीवन को व्यर्थ कर रहा है।जीव हत्या करके,गंदे कर्मो में फंस कर।जिस बात से आपको कष्ट होता है मत भूलो उसी बात से दूसरों को भी कष्ट होता है।उन्होंने कहा कि संचय केवल इतना करो कि आपका काम चल जाये।