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धूमिल हो रही मेवात मॉडल स्कूलों की छवि

तावडू : मेवात मॉडल स्कूल की कार्यशैली पर एक बार फिर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। अब नूंह स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा द्वारा हॉस्टल में फांसी लगाने की घटना सामने आई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। घटना में क्या सामने आएगा ये तो जांच का विषय है लेकिन इस घटना ने इन स्कूलों की कार्यशैली पर अवश्य प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

ढाई दशक पूर्व सरकार द्वारा प्रदेश के सबसे पिछड़े नूंह जिले में बच्चों को न्यूनतम शुल्क पर उच्च गुणवत्ता की शिक्षा देने को लेकर इन स्कूलों को खोला गया। कुछ समय तक तो स्कूलों ने खूब प्रशंसा प्राप्त की। लेकिन बाद में स्कूल में अध्यापकों व अन्य पदों की भर्ती, निर्माण कार्य व अन्य कार्यों में भ्रष्टाचार के दाग ने स्कूलों की छवि को कलंकित करना शुरू कर दिया। तब भी जनता का इन स्कूलों से भरोसा नहीं डगमगाया। लेकिन गत दो वर्ष से इन स्कूलों में जो घटनाक्रम हो रहा है उसने अभिभावकों को सोचने पर अवश्य मजबूर कर दिया है। गत वर्ष तावडू स्कूल में कार्यरत अध्यापक सरफराज पर छात्राओं के साथ अनगर्ल बातों को सांझा करने के आरोप लगे। उसके बाद मढ़ी स्कूल के तीन अध्यापकों पर ¨हदू बच्चों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने के आरोप लगे।

ये मुद्दे ठंडे नहीं पड़े कि कुछ दिनों पूर्व फिरोजपुर झिरका स्कूल के अध्यापक साकिर पर स्कूल की छात्रा के साथ छेड़खानी का आरोप लग गया। अब जो घटना सामने आई है उसने तो प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। मेवात मॉडल स्कूल नूंह के हॉस्टल में गत मंगलवार को 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने फांसी लगा ली। पुलिस गहनता से मामले की जांच में जुटी है। लेकिन इस घटना ने झकझोर कर रख दिया है तथा अभिभावकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है क्या उनके बच्चे इन स्कूलों में सुरक्षित हैं?