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टीचर हमें गालियां देती हैं मैडम जी, झूठे बर्तन मंजवाती हैं

मैडम जी, हमारी एसएस की टीचर हमें यूं कहती है कि तुम ... जाति की हो। खा-खा के सांड होती जा रही हो। और वो हमसे झूठे बर्तन भी मंजवाती हैं। स्कूल में आते हुए और जाते हुए भी लड़के हमें छेड़ते हैं। न तो टीचर कुछ करती हैं न ही कोई पुलिस वाला ही होता। गांव फतेहपुर के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय की छात्राओं की यह व्यथा हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य रमनदीप कौर व टीम के सामने रखी। उनके लहजे में अजीब सी बेबसी थी, जिसे समझकर रमनदीप कौर ने उनसे अलग से बंद कमरे में बात की। हैरान कर देने वाली बातें छात्राओं ने उन्हें बताई। इसी तरह राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जब यह टीम पहुंची आधी छुट्टी हो चुकी थी। छात्राएं मिड डे मील खा रही थीं। यहां भी छात्राओं ने आयोग के सामने छेड़छाड़ की शिकायत रखी।

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यह तो जंगल राज है

पूंडरी के राजकीय कन्या स्कूलों का दौरा कर वहां के हालात का जायजा लिया। स्कूलों के हालात देखकर कौर को ये कहना पड़ा कि क्या यहां जंगलराज है। अपने दौरे के दौरान जब आयोग की सदस्या राजकीय कन्या विद्यालय फतेहपुर पहुंची तो वहां फैली अव्यवस्था से वे काफी नाराज दिखी। स्कूल का अधिकतर स्टाफ छुट्टी पर मिला और जो हाजिर मिला वे भी आधी-अधूरी जानकारी ही उपलब्ध करवा पाया। मिड डे मील के खाना बनाने वाले बर्तनों में कुत्ते मुंह मारते मिले और हद तो जब हो गई जब कुछ बच्चों ने आयोग की सदस्या के समक्ष ये कह दिया कि झूठे बर्तन भी वे खुद साफ करते है।

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सारे कुक हटाने के आदेश

आयोग की सदस्य ने प्रधानाचार्या से स्पष्ट कह दिया कि कल से खाना बनाने वाले नए रख लें, अब ये कर्मचारी यहां काम नहीं करेंगी। उन्होंने स्कूल की बदहाल स्थिति पर भी नाराजगी जताई और खंड शिक्षा अधिकारी को स्कूल की प्रधानाचार्या से इस बारे लिखित में स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए। आयोग की टीम ने स्थिति में सुधार के लिए दिशानिर्देश देते हुए स्कूलों में मिली कमियों को सूचीबद्ध भी किया।

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चार साल से नहीं हुआ साइंस प्रैक्टिकल

पूंडरी के राजकीय कन्या

कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में भी स्थिति बदहाल ही मिली। दौरे के दौरान आयोग की सदस्या ने विज्ञान कक्ष देखने की बात कही तो विज्ञान की शिक्षिका ने करीब दोपहर बारह बजे विज्ञान कक्ष खोला। विज्ञान कक्ष की हालात देखकर आयोग की सदस्या ने कहा कि क्या विज्ञान कक्ष को नियमित रूप से नहीं खोला जाता। जिस पर विज्ञान शिक्षिका ने सफाई दी कि वे यहां सितंबर से आई है और 4 साल से यहां विज्ञान अध्यापक का पद खाली पड़ा था।

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