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यहां तो फुटपाथ पर ही सजता है बाजार

चरखी दादरी : दादरी नगर के अधिकतर बाजारों में पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए फुटपाथों पर अवैध तरीके से लगातार कब्जे होने से अब लगता है कि सार्वजनिक संपत्ति, आम रास्तों पर कुछ लोगों ने अपना अधिकार समझ लिया है। बाजारों में सड़कों, फुटपाथों पर स्थानीय नगर परिषद द्वारा शुरू की गई अतिक्रमण हटाओं मुहिम महज नूरा कुश्ती दिखाई देती है। फुटपाथों के साथ यह समस्या लगातार बढ़ने से न केवल नगर योजना का स्वरूप ध्वस्त होता जा रहा है बल्कि हालात बेकाबू भी होते दिखाई दे रहे है। यहीं स्थिति बनी रही तो एक दिन दादरी नगर के सभी मुख्य बाजारों, सड़कों पर फुटपाथों के गायब होने के साथ मुख्य मार्गो पर चलना दुश्वार हो जाएगा। तीन दशक पहले तक अपनी सुव्यवस्थित व्यवस्था, सड़कों, फुटपाथों, खुले रास्तों के लिए दादरी शहर प्रदेश के बेहतर नगरों में शुमार किया जाता था। साल दर साल स्थिति बदलती गई। दुकानदारों द्वारा एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में पहले बाजारों में सड़कों के साथ बने कवर्ड नाले गायब हुए, फिर दोनों ओर पैदल चलने वालों के लिए बनाए फुटपाथों पर अवैध कब्जे होने लगे। इसके बाद बारी सड़कों की आई तथा हालात गंभीर बनती गई। जब अतिक्रमण, अवैध कब्जों की समस्या शहर के लिए नासूर बन गई तब स्थानीय नगर परिषद को होश आया। इस दौरान काफी देर हो चुकी है तथा अब इसे समस्या नहीं बल्कि विपदा कहें तो गलत नहीं होगा, इस पर काबू पाना भी उतना ही मुश्किल होता जाता रहा है। वैसे तो किसी भी सार्वजनिक समस्या से निपटने में आम लोगों में जागरूकता होना जरूरी है परंतु यहां नगर परिषद की जिम्मेदारी अधिक दिखाई देती है आरोप तो यहां तक लगाए जाते रहे है कि दादरी नगर में बढ़ते अतिक्रमण, अवैध कब्जों के पीछे परिषद का आंखें मूंदने का रवैया तथा मिली भगत रही है। हालांकि अवैध कब्जों, अतिक्रमण की समस्या इन दिनों बड़े से बड़े शहर छोटे कस्बे भी जूझ रहे है लेकिन दादरी में बने हालात काफी विकट दिखाई दे रहे है। कोई प्रभावी कार्यवाही न होने से कब्जाधारियों के हौंसले बुलंद होते जा रहे है। इनके सामने व्यवस्था पूरी तरह लाचार नजर आती है