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फर्जी दस्तावेज लगा स्कूली नेशनल चैंपियनशिप में उतरा कॉलेज का छात्र

63वीं स्कूली नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिला से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पर अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर कॉलेज का एक छात्र शॉटपुट प्रतियोगिता में शामिल हुआ। उसने मंगलवार को सिल्वर मेडल भी जीत लिया, लेकिन जब उसे डोप टेस्ट के लिए बुलाया तो वह बाथरूम जाने की कहकर नहीं आया।

रोहतक निवासी यह खिलाड़ी 2015 से भिवानी में संचालित साई के एथलेटिक्स सेंटर में ट्रेनिंग ले रहा है। उसने जिले के ज्योति प्रकाश स्कूल के फर्जी दस्तावेज लगाकर खुद को उस स्कूल का खिलाड़ी बताया, जबकि उसने वहां दाखिला ही नहीं लिया हुआ था। वहीं, दिल्ली से बनवाए उसके जन्म प्रमाणपत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं। उसके डोप टेस्ट न करवाने की वजह से स्कूल गेम्स फेडरेशन आॅफ इंडिया ने उसका मेडल व रैंकिंग को रद्द करते हुए चैंपियनशिप से बाहर कर दिया है। वहीं, शिक्षा विभाग भी इस मामले को हल्के में लेकर दबाने की कोशिश में है। मामला प्रकाश में आने के 24 घंटे बाद आरोपी खिलाड़ी गोपनीय ढंग से एसजीएफआई व स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों के पास पहुंचा और बयान में बताया कि वह कॉलेज का छात्र है। जन्म प्रमाणपत्र में आयु कम लिखाकर वह स्कूल स्तर पर होने वाली नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेता है।

वर्ष 2016 में गुजरात के वड़ोदरा जिले में हुई अंडर 17 आयु वर्ग की नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरियाणा की तरफ से खेलते हुए शाॅटपुट में गोल्ड मेडल जीतकर रिकाॅर्ड बनाया था। अंडर 17 आयु वर्ग के खिलाड़ियों का नाडा डोप टेस्ट नहीं लेती। अंडर 19 आयु वर्ग की एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी खिलाड़ी को डोप टेस्ट होने की संभावना नहीं थी, लेकिन सिल्वर मेडल जीतने के बाद उसे जैसे ही नाडा टीम ने डोप टेस्ट देने के लिए बुलाया तो खिलाड़ी बहाना बनाकर चला गया। खिलाड़ी द्वारा सैंपल न दिए जाने से इस बात की प्रबल संभावना है कि उसने प्रतिबंधित दवाओं का सेवन किया होगा