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निगम के रिहायशी क्षेत्रों में भुगतान करने पर मिलेगी अतिरिक्त निर्माण की मंजूरी

फरीदाबाद : राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों (निकाय परिधि) में रिहायशी प्लाटों पर अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) की नीति को मंजूरी दे दी है। शहरी स्थानीय निकाय की वेबसाइट पर यह नीति अपलोड भी कर दी गई है। इससे पहले यह नीति केवल निकाय परिधि से बाहर नियंत्रित क्षेत्रों के लिए ही थी। नीति के अनुसार अतिरिक्त एफएआर के लिए विभिन्न शहरों के लोगों को अलग-अलग दर से भुगतान करना होगा। गुरुग्राम-मानेसर के लोगों को सबसे ज्यादा 1600 से 8080 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से तो फरीदाबाद, सोहना, पानीपत, पंचकूला, सोनीपत में 1300 से 5450 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान करना होगा। प्रत्येक पांच साल के बाद ये दर दस फीसद बढ़ जाएगी।

ढाई मंजिल से तीन मंजिल बनाने में होगी आसानी : अतिरिक्त एफएआर लेकर लोग अब ढाई मंजिल की जगह तीन मंजिल का पूरा निर्माण कर सकेंगे। विभिन्न प्लाट आकार पर 33 से 80 फीसद तक एफएआर बढ़ाया गया है। इस नीति से फरीदाबाद व गुरुग्राम सहित राज्य के बड़े शहरों में लोग अपने अवैध निर्माण भी नियमित करा सकेंगे। इतना ही नहीं इससे स्थानीय निकाय संस्थाओं को अतिरिक्त आमदनी भी होगी।

भुगतान आधारित अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशो की मंजूरी से अब लोग अपने रिहायशी प्लॉट पर नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों में अतिरिक्त निर्माण कर सकेंगे, मगर इस नीति से ग्राउंड फ्लोर पर अतिरिक्त निर्माण नहीं हो सकता। निर्माण के लिए गुरुग्राम, मानेसर को हाइपर सिटी मानते हुए दर तय की गई हैं तो अन्य शहरों के लिए उनके लिए अलग से दर तय की गई हैं। 75 वर्ग मीटर के प्लाटधारकों के लिए सरकार ने 33 फीसद अतिरिक्त एफएआर निश्शुल्क प्रदान किया है।

-आनंद मोहन शरण,

प्रधान सचिव, शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा

इस नीति में दो बड़ी खामियां हैं। एक तो जिस बढ़े एफएआर के लिए राज्य सरकार ने शुल्क तय किया है, दिल्ली में उससे भी ज्यादा एफएआर निश्शुल्क दिया जा रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को एनसीआर के बड़े शहरों में यह बढ़ा हुए एफएआर का शुल्क नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा ग्राउंड कवरेज भी दिल्ली की तर्ज पर 90 फीसद तक होनी चाहिए। बिना जॉ¨नग वायलेशन को रेगुलाइज किए इस नीति का फायदा शहरी क्षेत्रों को नहीं मिलेगा। जॉ¨नग वायलेशन का शुल्क तय किया जा सकता है इससे स्थानीय निकाय की आमदनी भी बढ़ेगी।