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संगरूर बार पदाधिकारियों के लाइसेंस रद करने के विरोध में वकीलों का वर्क सस्पेंड

अंबाला शहर : हरियाणा एवं पंजाब हाइकोर्ट बार काउंसिल द्वारा पंजाब में संगरूर बार एसोसिएशन के प्रधान गुर¨वदर ¨सह चीमा तथा महासचिव गौरव गर्ग के लाइसेंस रद करने के विरोध में अंबाला में वकीलों ने वर्क सस्पेंड रखा। कोर्ट में दाखिल होने पर मुख्य दरवाजे पर बैठ गए, कोई कोर्ट में पेश नहीं हुआ। लाइसेंस निलंबन का कारण यह रहा कि पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल अप्रैल माह में एसोसिएशन के चुनाव कराने का निर्णय ले रही थी जबकि संगरूर एसोसिएशन ये चुनाव 20 दिसंबर को करवा रही थी। लाइसेंस रद करने के विरोध में संगरूर से काल के बाद वकीलों ने काम का बहिष्कार किया। इस दौरान पेशी पर आए पैरवीकारों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ के लिए वर्क सस्पेंड राहत तो किसी के लिए नागवार गुजरा। कोर्ट से मामलों की अगली तारीख लगा दी गई। जानकारी के अनुसार सुबह करीब 10 बजे कोर्ट का काम शुरू होने से पहले वकीलों ने वर्क सस्पेंड कर दिया। केवल पैरवीकार कोर्ट तक पहुंचे, वकील बाहर बैठ गए, उनके मुंशियों ने पैरवीकारों को केस की डेट दिलवाई। कुछ केसों में फैसले होने थे, जिनमें से केवल एक पर कोर्ट ने फैसला सार्वजनिक कर दिया जबकि अन्य की डेट दे दी गई। जिला बार एसोसिएशन की कार्यकारी कमेटी के सदस्य एडवोकेट एसएम शर्मा तथा एडवोकेट बैकुंठ नाथ ने बताया कि संगरूर बार एसोसिएशन की काल पर वर्क सस्पेड रखा गया है। पदाधिकारियों के लाइसेंस रद करने के निर्णय को गलत करार देते हुए बताया कि केवल चुनाव कराने के निर्णय का विरोध करने पर लाइसेंस रद नहीं किया जा सकता। यदि पदाधिकारी काउंसिल की खिलाफत करते, कोई गलत काम करते तो काउंसिल पक्षों का बुलाकर सुनवाई कर सकती है। दोषी पाए जाने के बाद कोई निर्णय लेती। उधर, नाम पर छापने की शर्त पर पैरवी के लिए आए कुछ लोगों ने जिला बार एसोसिएशन के वर्क सस्पेंड के निर्णय पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि कोर्ट में काम ठप्प रखना, कभी छुट्टी के लिए तो कभी किसी मांग के लिए, आम बात हो चुकी है। ऐसे में उन्हें परेशानी होती है। दूर-दूर से लोग आते हैं तथा बिना किसी फैसले के वापस चले जाते हैं। ऐसे में उन्हें आर्थिक तंगी व मानसिक परेशानी भी सहनी पड़ती है। एसोसिएशन को चाहिए कि वह कोई बीच का रास्ता निकाले, जिसने उनके साथ पैरवीकारों को भी परेशानी न हो।