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महापंचायत के माध्यम से हजारों किसानों ने दी बड़े आन्दोलन की दस्तक

करनाल/निसिंग, 19 दिसम्बर : डेढ़ दशक बाद भी किसानों का जोश और आन्दोलन करने की ताकत आज भी कायम है। इस बात का नजारा निसिंग अनाज मंडी में दिखाई दिया। जहां पर 1993 में 7 जनवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल का घेराव किया था।

जहां से अधिकारियों को मार्किट कमेटी के कार्यालय  की दिवार तोड़कर तत्कालीन मुख्यमंत्री को खेतो में से होकर ले जाना पड़ा था। उस दौरान 2 किसान शहीद हुए थे। यह आन्दोलन भी बिजली की दरो को लेकर था। आज भी इसी स्थल पर किसानों की महापंचायत हुई थी। जिसमें हजारों किसान मौजूद था। उन किसानों का जज्बा देखने लायक था। किसानों ने साफ तौर पर ऐलान किया कि यदि मुख्यमंत्री किसानों को गिरफ्तार करना चाहे तो तारीख निर्धारित करें। खुद किसान जेल के बाहर पहुंच जाऐंगे। सरकार की जेल कम पड़ जाएगी। लेकिन किसानों की संख्या कम नहीं होगी। अनाज मंडी में आयोजित महापंचायत में किसानों ने सरकार की जगमग योजना के खिलाफ हुंकार भरी।

महापंचायत की अध्यक्षता निसिंग के किसान नेता स. मांगा सिंह लागर ने की। किसानों का नेतृत्व भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने की। यह महापंचायत भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले आयोजित की गई। सबसे पहले इस महापंचायत में 10 जनवर, 1993 को शहीद हुए किसान नेता लखपत ओर मामचन्द की कुर्बानी को याद किया गया। इस अवसर पर किसान नेता रतनमान ने बताया कि जगमग योजना किसानों पर भारी पड़ रही है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान नेताओं की अदायगी क्षमता से बाहर बिजली के बिल हो रहे है। ओंगद गांव के किसान ने अपने घर के दो महीने का बिल 68 हजार आने पर चिंता जताई और बिल पंचायत में पेश किया।

कई किसान ऐसे थे, जिनका 3 से 4 हजार रुपए महीने का बिल आ रहा था। इस सबसे परेशान किसानों की आंखे नम थी। वह समझ नहीं पा रहे थे कि सरकार आखिरकार उन्हें क्यों परेशान कर रही है। किसानों ने बताया कि सरकारी की जगमग योजना किसानो के लिए काल बनी हुई है। यदि सरकार ने यह योजना वापिस नहीं ली तो किसान सरकार की ईंट से र्इंट बजा देंगे।

इस अवसर पर एस.डी.ओ को ज्ञापन दिया गया।