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सवालों के व्यूह में फंसे कृष्ण, गो-सेवा से खड़े किए हाथ

 करनाल निगम के गोधाम व नंदीग्राम पर सवालों के व्यूह में फंसे डिप्टी सीनियर मेयर कृष्ण गर्ग सोमवार को बचाव की रणनीति अपनाए हुए थे। उठ रहे सवालों का जवाब देने की बजाय उन्होंने चुनौती दी कि किसी में माद्दा है तो गायों की सेवा करके दिखाएं? इस मुद्दे पर बैठक में गर्ग सवालों के जवाब देने की बजाय उलझते रहे और जब उन्हें लगा कि वह फंस रहे हैं तो उन्होंने एक दांव खेला। उन्होंने कहा कि वे गोधाम व नंदीग्राम का संचालन नहीं करेंगे। गर्ग सोच रहे थे कि विरोधी पार्षद उनके इस दांव पर घिर जाएंगे। क्योंकि ऐन मौके पर यदि वह संचालन छोड़ देते हैं तो इतनी जल्दी संभालेगा कौन? लेकिन उनकी यह चाल ज्यादा असरकारक साबित होती नजर नहीं आ रही। दो दौर की मैराथन बैठक के बाद शाम को हाउस की बैठक में तय किया गया कि संचालक के लिए एक चार सदस्य कमेटी गठित कर दी जाए। मसले पर अगली बैठक के लिए 21 दिसंबर तय किया गया।

कमेटी नंदीग्राम पर रखेगी नजर

काफी देर बहस के बाद बैठक में नंदीग्राम की खराब व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाने पर सहमति बनी। अब कृष्ण गर्ग के अलावा रोहताश लाठर, नरेंद्र पंडित व सुदर्शन कालड़ा भी इस पर निगरानी रखेंगे। गोवंश पर अत्याचार नहीं हो इसलिए 21 दिसंबर को दोबारा बैठक होगी। इसमे नंदीग्राम व गोधाम को लेकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

मेयर ने अन्य विकल्प तलाशने का सुझाव दिया

सीनियर डिप्टी मेयर ने हाथ खड़े किए तो मेयर रेनू बाला गुप्ता ने अन्य विकल्प तलाशने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हाउस को एक-दो दिन का समय देना चाहिए। यदि कोई समाजसेवी संस्था गोवंश की सेवा की जिम्मेदारी लेती है तो इसकी जिम्मेदारी उन्हें सौंप देंगे। लेकिन कमिश्नर ने कहा कि यह गायों का मुद्दा है और इस पर तत्काल इसी बैठक में फैसला लेना होगा।

पूरा दिन चला बैठकों का दौर

नगर निगम में सुबह से गोंवश की मौत का मुद्दा गर्मा गया। पूरा दिन बैठक का दौर चलता रहा। सुबह कमिश्नर, ईओ व सीनियर डिप्टी मेयर ने बैठक की। इसके बाद तीनों की काफी देर तक मेयर के साथ गुफ्तगू चली। फिर हाउस की आपताकाल बैठक बुलाने पर सहमति बनी। शाम को चार बजे हाल ही में मनोनीत तीन पार्षदों के साथ अन्य पार्षद भी इसमें पहुंचे।

पार्षदों की बजाय परिजनों ने की बहस

शाम को चार बजकर 20 मिनट पर गहमागहमी के साथ मी¨टग शुरू हुई। पत्रकारों को देखकर कमिश्नर प्रियंका सोनी ने कहा कि यह हाउस की बैठक है और इसमें केवल मनोनीत सदस्य ही बैठ सकते हैं। फजीहत से बचने के लिए मीडियाकर्मियों को बाहर भेज दिया गया। जबकि कई पार्षदों के स्थान पर उनके परिजन बैठक में ही बैठे रहे। हाउस के सदस्य नहीं होने के बावजूद वह अंदर रहे और पार्षदों की तरफ से वाद-विवाद भी किया। निगम कमिश्नर से इसकी वजह पूछी गई तो वह जवाब नहीं दे पाईं।

कमिश्नर गर्ग के पक्ष में, लेकिन बचाव के तर्क नदारद

हालांकि निगम कमिश्नर पूरी तरह से गर्ग के पक्ष में खड़ी नजर आईं। उन्होंने कहा कि जिस हालात में गर्ग ने काम संभाला है, वह बड़ी बात है। निगम की अपनी मजबूरी है। लेकिन उनके पास गर्ग पर उठ रहे सवालों का जवाब नहीं था। जागरण संवाददाता के सवालों पर आखिर में उन्होंने स्वीकारा कि लापरवाही रही है। संशाधनों की कमी है इसलिए गोधाम व नंदीग्राम को स्वर्ग नहीं बना सकते हैं। व्यवस्था को सुधारने के लिए आगे प्रयास जरूर करेंगे। पशुपालन विभाग को लिखेंगे कि वह सप्ताह में एक दिन नंदीग्राम का दौरा जरूर करें।