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नागरिक अस्पताल में दवाओं का टोटा

गुरुग्राम : जिला नागरिक अस्पताल में दवाओं को टोटा बना ही रहता है। मरीजों को कभी भी डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा पूरी नहीं मिलती। वर्ष भर में कभी भी सभी दवाई नहीं मिली। जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दवाओं की मांग भेजते हैं और यह एक तरह से अलग ¨वग है, जिसका अलग काम है।

दरअसल शिशुरोग, मेडिसिन, मनोरोग, चर्मरोग, हड्डी रोग, गायनी वार्ड व कान-नाक और आखों की ओपीडी में हर माह हजारों मरीज इलाज कराने आते हैं लेकिन इस संख्या में बहुत कम मरीज होते हैं जिन्हें डॉक्टर द्वारा लिखी गई सभी दवाएं मिलती है। मरीज किसी भी बीमारी का हो, उसे डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा बाजार से खरीदनी ही पड़ती है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें जो सरकार की तरफ से दवा लिखने का आदेश मिला है उसी हिसाब से दवा लिखते है। दवा मिले या नहीं मिले यह मरीज व प्रबंधन को देखना है।

सबसे ज्यादा मेडिसिन व चर्म रोग व शिशु रोग और नेत्र रोग के मरीजों को परेशानी होती है। इनकी दवा कम ही मिलती है। चर्म रोग की दवा महंगी होती है और उसकी सप्लाई कम होती है। यही कारण है कि चर्म रोग के मरीज को कुछ सस्ती दवाओं को छोड़कर अन्य दवा नहीं मिलती।

हम समय-समय पर मांग भेजते रहते हैं और दवाओं की सप्लाई आती रहती है। इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है कि किन कारणों से सभी दवा नहीं आती।