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सैनिकों के सम्मान में कांग्रेसियों की सियासत

पानीपत: गुजरात और हिमाचल में हार के बाद भी कांग्रेसियों ने सबक नहीं लिया। गुटबाजी का ये हाल रहा कि शहीदों के लिए आयोजित समारोह से ही एक पक्ष ने दूरी बना ली। वो भी तब, जब लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहीं।

पूर्व विधायक राजरानी पूनम ने सोमवार को विजय दिवस के बहाने सैनिकों के सम्मान की पहल की। इस आयोजन से हुडा गुट के नेता-कार्यकर्ता दूर रहे। हरियाणा कांग्रेस के प्रधान डॉ. अशोक तंवर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा गुट के बीच सिर फुटव्वल की घटना तो सभी तो याद होगी। इसके बाद भी कई ऐसे मौके आए, जब पार्टी के ये दोनों छोर आपस में भिड़ते दिखे। यूथ कांग्रेस के संगठन चुनावों के दौरान भी गुटबाजी ने खूब पैर पसारे। पार्टी सूत्रों की मानें ता जिलाध्यक्षों के चुनावों को भी गुटबाजी के कारण ही टाला जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए भी तंवर के अलावा भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हरियाणा कांग्रेस की राजनीति के इन दो धुरंधरों की गुटबाजी का असर पानीपत में भी देखने को मिलता है। शहर में कांग्रेस के किसी कार्यक्रम का आयोजन हुड्डा गुट ने किया है तो तवंर गुट नदारद रहेगा। आयोजन तंवर गुट ने किया तो हुड्डा गुट किनारा कर लेगा। दो माह पहले हुए एससीएसटी वर्ग के कार्यकर्ता सम्मेलन में ऐसा नजारा देखा गया। आर्य पीजी कॉलेज में हुए विजय दिवस कार्यक्रम में भी पूर्व विधायक राजरानी पूनम ने करीब 800 निमंत्रण पत्र बांटे। निमंत्रण में हुड्डा गुट को नजरअंदाज किया गया। कार्यक्रम में मीरा कुमार जैसी बड़ी नेता की शिरकत के बावजूद, हुडा गुट (बुल्लेशाह ब्रदर्स एंड पार्टी) कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इधर, राजरानी पूनम के पति कर्मचंद पूनम ने बताया कि सार्वजनिक आयोजन था, किसी को आने की मनाही नहीं थी।

विजय दिवस के कार्यक्रम में मंच पर बड़ा बैनर लगाया गया था। इस बैनर पर सबसे ऊपर एक कोने पर स्वर्गीय इंदिरा गांधी तो दूसरे कोने पर राहुल गांधी का फोटो था। इनके नीचे मीरा कुमार व उनके पिता बाबू जगजीवन राम का फोटो था। इसके बाद अशोक तंवर, किरण चौधरी व राजरानी पूनम को फोटो छपवाया गया था। पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं को शिकायत रही कि जगजीवन राम, इंदिरा गांधी के समय में रक्षामंत्री रहे। उनका फोटो भी इंदिरा के साथ होना चाहिए था