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दिनोद आश्रम में पॉलीथिन लाने पर है पाबंदी

भिवानी:..यहां एक आश्रम ऐसा भी है। जहां पॉलीथिन में प्रसाद लाने पर पांबदी है। कोई नया श्रद्धालु प्रसाद पॉलीथिन में ले भी आए तो उसे प्रसाद लेकर वापस पॉलीथिन लौटा दिया जाता है। साथ यही यह भी शपथ दिलाई जाती है कि वह भविष्य में पॉलीथिन में प्रसाद लेकर नहीं आएगा। इतना ही नहीं साथ ही उसे रोजमर्रा के कार्यों आदि में पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करने के लिए भी समझाया जाता है। श्रद्धालुओं ने भी इस पर अमल करना शुरू कर दिया है। श्रद्धालुओं को कपड़े के थैले प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाता है। राधा स्वामी दिनोद आश्रम के संत कंवर महाराज ने दैनिक जागरण की पॉलीथिन मुक्त भिवानी बनाने की मुहिम की सराहना की और कहा कि वास्तव में यह काबिलेतारीफ है। वह कहते हैं कि पॉलीथिन जब हमारे लिए इतना ज्यादा नुकसानदायक है तो इसका प्रयोग किस लिए किया जाए। उन्होंने आश्रम में भी जगह-जगह पोस्टर चस्पा रखे हैं कि यहां आने वाले श्रद्धालु प्रसाद आदि पॉलीथिन में लेकर न आए। कई बार पहली बार आने वाले नए श्रद्धालु प्रसाद पॉलीथिन की थेलियों में लेकर भी आ जाते हैं। ऐसे में उनका प्रसाद तो ले लिया जता है पर पॉलीथिन वापस लौटा दिया जाता है।

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कपड़े के थैले का करें प्रयोग

संत कंवर महाराज ने कहा कि पॉलीथिन का प्रयोग और इसका जलाना तो और भी ज्यादा हमारे लिए नुकसानदायक है। इसके खुले में डालने से गाय, नंदी व अन्य पशु इसे खा लेते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है। इसको खुले में जलाया जाता है तो इसके धुएं जहरीली गैसें निकलती हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही घातक हैं। इससे जो भी सामान रखा जाता है वह अच्छी चीज भी हमारे स्वास्थ्य के लिए खराब साबित होती है। इसलिए वह दिनोद आश्रम में प्रतिदिन सुबह 10 से 11 और दोपहर बाद 2 से 3 होने वाले सत्संग के अलावा अन्य हर छोटे बड़े सत्संग में भी श्रद्धालुओं को पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करने के लिए समझाते हैं। श्रद्धालुओं को यह बात समझ भी आ रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में पॉलीथिन के प्रयोग से बचें यह हमारे लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक है। महाराज बोले कि पॉलीथिन की जगह श्रद्धालु रोजमर्रा के कार्यों में कपड़े के थैले का प्रयोग करें।