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ज्योति हत्याकांड में आरोपी रहे दून के विधायक रामकुमार चौधरी भी हारे

पंचकूला : बहुचर्चित ज्योति हत्यांकाड में आरोपी रहे दून के विधायक रामकुमार चौधरी सोमवार को आए हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणाम में हार गए है। रामकुमार चौधरी पांच साल पहले सुर्खियों में आए थे, जब होशियारपुर की ज्योति का शव 22 नवंबर 2012 की सुबह सेक्टर-21 में सड़क पर मिला था।

उसके चेहरे पर गाड़ी चढ़ाकर पहचान मिटाने की कोशिश भी की गई थी। ज्योति का बाकी सामान तो था, परतु मोबाइल फोन गायब थे। ज्योति ने अपने पिता बूटी राम को आखिरी बार फोन कर कहा था कि वह राम कुमार चौधरी के साथ जा रही है। पुलिस ने इसके बाद हत्या का मामला दर्ज किया था। ज्योति के पर्स से रामकुमार चौधरी का विजटिग कार्ड भी मिला था। जिसके बाद पुलिस ने रामकुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। 8 जनवरी 2013 को रामकुमार ने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। कोर्ट में ट्रायल के दौरान पुलिस रामकुमार को दोषी साबित करने में नाकाम साबित हुई। मामले में हाईकोर्ट में सरकार की ओर से निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर रखी है। फास्ट ट्रैक अदालत से 11 सितंबर 2014 को रामकुमार चौधरी को ज्योति की हत्या के मामले में बरी कर दिया गया था। इसके बाद पंचकूला पुलिस की अच्छी खासी किरकिरी हुई थी। 16 सितंबर को पुलिस ने एक विशेष जांच दल का गठन किया था। इसने जांच में पाया कि पुलिस के पास रामकुमार चौधरी के खिलाफ पुख्ता सुबूत थे, जिसके आधार पर रामकुमार को सजा हो सकती थी।

पंचकूला के अटार्नी जनरल एसपीएस परमार ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस मामले में कई खामियां थी, जिसकी वजह से आरोपी को बरी होने में आसानी हो गई। उसके बाद पुलिस की भी ऐसी ही रिपोर्ट आई है। दोनों रिपोर्टाें को देखने के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने अपील की फाइल पर हस्ताक्षर कर सरकार को रामकुमार के खिलाफ आगे मुकदमा करने की सिफारिश कर दी थी