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आज के दौर में संयुक्त परिवार टूटकर एकल परिवारों में हो रहे परिवर्तित

अंबाला : आज के समय में औद्योगिक विकास के चलते संयुक्त परिवारों का बिखरना जारी है, इसका मुख्य कारण है रोजगार पाने की आकांक्षा, बढ़ती जनसंख्या व घटते रोजगार। इसी कारण परिवार के सदस्यों को अपनी जीविका चलाने के लिए गांव से शहर की ओर या छोटे शहर से बड़े शहरों को जाना पड़ता है और विदेश जाने की आवश्यकता पड़ती है। एक वह समय था जब परिवार के लिए एक साथ मिलकर रहते थे। यह बदलाव भी जरुरी है। यह विचार आर्मी से रिटायर्ड कैप्टन एस सी तलवार ने दैनिक जागरण से सांझा किए। उन्होंने कहा कि बदलाव के दौर में अगर इन चीजों को समेटना बहुत जरूरी है। अगर संयुक्त परिवार रहेंगे तो बच्चे भी संस्कारी होंगी और अपने माता-पिता का सम्मान भी करेंगे। एकल परिवारों के कारण युवा पीढ़ी संस्कार हीन बनती जा रही है।

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जनसंख्या बढ़ रही तो रोजगार हो रहा कम

बुजुर्ग जे थॉमसन का कहना है कि पुराने समय व आज की जनसंख्या देखी जाए तो बहुत अंतर आया है। पहले जनसंख्या कम होती थी तो आसानी से रोजगार मिल जाया करते थे और परिवार का गुजारा चलता था। आज के समय में तो रोजगार कम होते जा रहे है और जनसंख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसी का नतीजा है कि अधिकतर युवा डिग्री व आधुनिक शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद रोजगार की तलाश में भटकते रहते हैं। रोजगार बढ़ने चाहिए।

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युवा पीढ़ी व हमारी सोच में आया बदलाव

डॉ. अनिल कुमार अग्रवाल का कहना है कि बदलाव केवल बड़ी- बड़ी बि¨ल्डगों व आसपास के माहौल में ही नहीं आया। बल्कि युवा पीढ़ी की सोच भी बदलते दौर से साथ बदलती जा रही है। अगर आज युवा पीढ़ी को समझाने व उनके भविष्य को संवारने के बाद अभिभावक करते हैं तो उन्हें गलत बताया जाता है। युवा पीढ़ी खुद को बहुत समझदार व एडवांस समझती है। ये बदलाव जरुरी है कि परंतु इतना भी नहीं होना चाहिए। युवा पीढ़ी को अपने से बड़ों की बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। तभी वह ऊंचाइयां तक पहुंच सकते हैं।