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कैब में बैठने लगने लगा है डर

 गुरुग्राम मल्टीनेशनल कंपनी डेंसो के एसोसिएट सुनील कुमार भट्ट की हत्या से कैब का इस्तेमाल करने वाले लोगों में दहशत का आलम है। लोगों को अधिकतर कैब चालक कातिल नजर आने लगे हैं। कैब में बैठने से पहले चालक का चेहरा ध्यान से देखने लगे हैं। यदि उसमें पहले से सवारी बैठी है तो उसके चेहरे का भाव भी समझने लगे हैं। इससे साफ लगता है कि भट्ट की हत्या ने किस कदर लोगों को हिला दिया है।

सुनील की लूटपाट करने के बाद कैब चालक व उसके अन्य साथियों ने बृहस्पतिवार को हत्या कर दी। इस घटना का व्यापक असर रविवार को शहर में दिखा। आम दिनों की तरह सड़कों के किनारे कैब रुकीं, लेकिन अधिकतर लोगों ने उसमें बैठने से इनकार कर दिया। बस अड्डे के आसपास भी काफी लोग कैब में नहीं बैठे। एप आधारित कैब सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों से संबंधित वाहनों का ही विशेष रूप से लोग उपयोग करते नजर आए। इसका भी उपयोग ऑनलाइन बु¨कग करने के बाद ही लोगों ने किया।

इस बारे में जब कुछ लोगों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि सुनील की हत्या की घटना ने उन लोगों को हिला दिया है। कैसे भरोसा करें कि उनके साथ सुनील जैसी घटना नहीं होगी। अब तो ऐसा लगता है जैसे सभी कैब चालक कातिल ही हैं। झाड़सा रोड से अक्सर कैब में बैठकर दिल्ली जाने वाले पटेल नगर निवासी राजकुमार ने बताया कि पहली बार उन्हें कैब में बैठने से डर लगा है। लूटपाट अलग बात है। एटीएम कार्ड छीनने के बाद भी हत्या कर दी गई। अब तो एटीएम कार्ड लेकर चलने में भी डर लगने लगा है। फव्वारा चौक के नजदीक से कैब पकड़ने वाले जैकबपुरा निवासी रंजन मेहता एवं जयकिशन ने बताया कि किसी के ऊपर भरोसा नहीं रहा। मेट्रो की यदि सुविधा हर इलाके तक हो तो कोई शायद ही कैब का इस्तेमाल करे।

एटीएम कार्ड की वजह से भी बढ़ रहीं घटनाएं

पिछले कुछ सालों से ऐसा देखा जा रहा है कि एटीएम कार्ड भी वारदात की वजह बन रहे हैं। बदमाश लोगों को बंधक बनाकर पहले एटीएम कार्ड छीनते हैं। इसके बाद एकाउंट से पैसे निकालते हैं। पैसा निकालने के बाद चलती कार से फेंक देते हैं या फिर हत्या कर देते हैं। इस तरह की कई घटनाएं दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे स्थित इफको चौक के नजदीक से हो चुकी है। द्वारका एक्सप्रेस-वे पर अक्सर ही इस तरह की वारदात होती रहती है। कई बदमाश पकड़े भी जा चुके हैं लेकिन वारदात कम होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं।

कैब चालकों का नंबर नोट कर रही है पुलिस

रविवार को गुरुग्राम पुलिस शहर में कई स्थानों पर व्यवसायिक वाहनों के नंबर नोट करती हुई दिखाई दी। जो नंबर सुनील कुमार भट्ट ने अपनी पत्नी के मोबाइल पर भेजा था, उससे मिलता जुलता नंबर भी नहीं दिखा। इससे साफ है कि वाहनों के ऊपर फर्जी नंबर प्लेट भी लगे हैं। हो सकता है जिस कैब में हत्या की गई हो वह व्यवसायिक वाहन भी न हो। कुछ दिन पहले एक ही वाहन के दो नंबर होने का मामला सामने आ चुका है। बताया जाता है कि काफी थ्री व्हीलर के नंबर फर्जी हैं या एक ही नंबर कई-कई थ्री व्हीलर के पीछे अंकित हैं।