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News Description
सामाजिकता का संदेश देता है इंडियन स्पॉट बील्ड डक

इंडियन स्पॉट बील्ड डक को ¨हदी भाषा में गुरगल बतख तथा संस्कृत में घर्घर हंसक के नाम से जाना जाता है। भारत में यह एक स्थानीय पक्षी है, जो देश के सभी राज्यों में पाये जाते हैं। इस पक्षी का नाम इंडियन स्पॉट बील्ड डक इसकी चोंच पर स्थित लाल चिह्न (स्पॉट) के कारण पड़ा है।

जब यह पक्षी उड़ता है तो इसके पिछले हिस्से में उड़ने वाले पंखों में एक चमकीली हरे रंग की पट्टी दिखाई देती है जिसके दोनों तरफ सफेद रंग की पट्टी होती है। बतखों की यह प्रजाति ज्यादा बड़ी झीलों की बजाय छोटी झीलों, तालाबों व जोहड़ों आदि जलीय वनस्पति वाली जगहों को पसंद करती है। यह एक सामाजिक पक्षी है जो आमतौर पर जोड़े या समूह में रहते हैं। इनके एक समूह में लगभग 50 बतखों तक रहते हैं। जब इन पक्षियों को कोई छेड़ता है तो एक साथ पानी की ओर उड़कर ऊंचाई पर जाती हैं।

आकार में यह पक्षी मलार्ड डक के समान होता है। इसके शरीर का अधिकांश भाग स्लेटी रंग का होता है जिस पर काफी अधिक रंग के शल्क बने होते हैं। इसके चोंच का आखिरी हिस्सा (टिप) पर पीला रंग व चोंच के आधार पर संतरिया लाल रंग का स्पॉट होता है जबकि बाकि चोच काले रंग की होती है तथा पंजे व पांव संतरिया रंग के होते हैं। नर पक्षी के चोंच पर ही लाल स्पॉट होता है।

आमतौर पर ये पक्षी शाकाहारी होते हैं जो पानी के आसपास उगी वनस्पति के बीज, अनाज जैसे दाल, चावल, घास व वनस्पति को खाती हैं। ये पक्षी पानी की सतह पर ही अपनी गर्दन को पानी में डूबोकर जलीय वनस्पति को खाती हैं। ये पक्षी ज्यादातर शाम या रात को भोजन करते हैं। इस पक्षी की आवाज मलार्ड पक्षी की तरह होती है। पानी में इसे मलार्ड पक्षी के साथ तैरते हुए देखा जा सकता है।

स पक्षी के प्रजनन का समय जुलाई से सितंबर तक का होता है। इस समय नर पक्षी मादा के साथ साथ पानी में तैरता है। मिलन के बाद नर पक्षी तेजी से कंपन करते हुए मादा पक्षी के इर्द गिर्द चक्कर लगाता है। मादा पक्षी पानी के तलहट पर वनस्पति में छिपकर घास को प्लेटफॉर्मनुमा घोसला बनाकर अंडे देती है। मादा पक्षी सात से दस तक अंडे देती है। जब चूजे होते हैं तो उन्हें बड़े होने तक पानी के आसपास ही लेकर खाना खिलाती है।

बतख की यह प्रजाति मलार्ड डक के साथ संकरित प्रजनन करती है। तालाब और जोहड़ घटने से इस पक्षी की संख्या भी धीरे धीरे कम हो रही है। इसके अलावा जब यह पक्षी अंडे देती है तो इसके अंडे लोमड़ी या जीव जंतु भी खा जाते हैं, जिस कारण अधिकांश चूजे बड़े नहीं हो पाते।