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चिकित्सक बोले, क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट से इंस्पेक्टर राज और भ्रष्टाचार को मिलेगा बढ़ावा

हिसार : दी हरियाणा क्लीनिक इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए), नेशनल इंटिग्रेटिड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) और इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आइडीए) के बैनर तले चिकित्सकों ने क्रांतिमान पार्क में इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया। निजी अस्पतालों में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह बाधित रखकर एक्ट के खिलाफ आवाज बुलंद की। सभी चिकित्सकों ने एक सुर में एक्ट को जन विरोधी और डॉक्टर विरोध बताया। यह भी कहा कि केंद्र का एक्ट लागू होने से छोटे अस्पताल बंद हो जाएंगे। बेरोजगारी बढ़ेगी और मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं पाने के लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी। इतना ही नहीं इंस्पेक्टर राज और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा, वह अलग। ऐसे में चिकित्सक संगठनों ने राज्य सरकार को चेताया है कि किसी भी सूरत में केंद्र सरकार द्वारा लागू एक्ट को नहीं माना जाएगा। इधर, स्वास्थ्य विभाग को अंदेशा था कि निजी अस्पताल बंद होने से मरीज इलाज के लिए सरकारी अस्पताल की ओर रुख करेंगे। हैरत की बात यह कि सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के दौरान नये मरीजों की संख्या में कुछ ज्यादा इजाफा नहीं हुआ। शुक्रवार को कुल 1137 मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जिनमें से नये मरीजों की संख्या 437 थी। बृहस्पतिवार के मुकाबले करीब 100 नये मरीज ही इलाज के लिए आए हुए थे। इतना ही नहीं निजी अस्पताल में चिकित्सकों के केबिन से लेकर वे¨टग रूम तक खाली रहे। वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। इस दौरान कहीं से ऐसी सूचना भी नहीं मिली कि निजी अस्पताल में इमरजेंसी केस में मरीज को भर्ती नहीं किया गया। हालांकि कुछ मरीज जरूर ओपीडी के बाहर खड़े मिले लेकिन वहां चस्पा नोटिस पढ़कर लौट गए। दरअसल, निजी अस्पतालों में अपॉइंटमेंट सिस्टम लागू है। मरीज आने से पहले फोन करके पूछ लेते हैं कि आना है या नहीं। आना है तो कब। ऐसे में अस्पताल में मरीजों ने फोन करके एक दिवसीय बंद की पुष्टि की, जिसके कारण अस्पतालों के बाहर चक्कर काट रहे मरीजों की संख्या चु¨नदा थी। इस अवसर पर आइएमए के जिला प्रधान डा. जेपीएस नलवा सहित करीब 300 चिकित्सक रोष प्रदर्शन में शामिल हुए।