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कानून सख्त हुआ पर हैवान खत्म नहीं हुए

गुरुग्राम पूरे देश को हिला देने वाले दिल्ली के वसंत विहार में सामूहिक दुष्कर्म (16 दिसंबर, 2012) मामले के बाद कानून में बदलाव हुआ, थानों में पीड़ित महिलाओं की सुनी जाने लगी। कई कदम उठाए गए, लेकिन इंसानियत को शर्मसार करने वाले हैवान खत्म नहीं हुए। इस साल के दौरान भी शहर में कई सनसनीखेज वारदात हुईं। मासूम बच्चियों को हवस का शिकार बनाने के बाद मौत के घाट उतार दिया गया। दो मामले में तो द¨रदे की पहचान भी नहीं हो सकी है। सुखराली के पास से चार माह पहले एक युवती को अपहृत कर चलती कार में दुष्कर्म करने के बाद उसे सड़क किनारे फेंक दिया था। पुलिस बदमाशों की पहचान भी नहीं कर पाई है। हालांकि दुष्कर्म और छेड़छाड़ के कई ऐसे में भी मामले सामने आए, जिसमें शिकायत कर्ता ने परेशान करने के लिए झूठे आरोप लगा दिए थे।

निर्भया कांड के बाद क्या हुआ सुधार

- पुलिस की ओर से त्वरित कार्रवाई होनी लगी

- थाना में महिला हेल्प डेस्क खोली गई, हालांकि कुछ थानों में बंद भी हो गई

- दो महिला थाना खुल गए।

- एमजी रोड पर तैनात की गई महिला त्वरित कार्रवाई टीम, जो कभी -कभार नजर आती है।

- सात दिन के अंदर पेश होने लगी अदालत में चार्जशीट

- शिकायत आते ही आरोपी की होने लगी गिरफ्तारी

- एमएनसी में देर रात तक काम करने वाली युवतियों व महिलाओं की सुरक्षा के लिए वॉट्सएप नंबर 8586976050 जारी किया गया। इसके अलावा ऐसी महिलाओं को सुझाव दिया गया है कि कैब आदि की सवारी करने से पहले उसका फोटो खींचकर पुलिस व परिजनों के वॉट्सएप नंबर पर भेज दें।

-बार व पब में होने वाली वारदातों को देख पुलिस ने प्रवेश रजिस्टर रखवा दिया है।

- समय-समय पर एंटी रोमियो और अब आपरेशन दुर्गा मुहिम चलाई गई

-महिला पुलिस कर्मियों की संख्या कम

महिलाओं को तब समय से न्याय मिलेगा जब थानों में महिला स्टाफ व आइओ अधिक होंगे।

-2011 की जनगणना में जिले में 6 लाख 97 हजार 742 महिलाओं के लिए मात्र 373 महिला पुलिस की तैनाती की गई है। विभाग में महिला पुलिस की कमी कई जगह खल रही है। जबकि यहां पर पद 459 महिला कर्मियों के हैं। दो माह पहले ही औद्योगिक थाना मानेसर में छेड़छाड़ की शिकायत लेकर पहुंची किशोरी को सात घंटे तक महिला पुलिस कर्मी का इंतजार करना पड़ा था। थाने में महिला जांच अधिकारी नहीं होने पर दूसरे थाने से बुलाई गई थी। हालांकि वहीं पर अब महिला थाना भी चल रहा है।

जिस तरह से महिला उत्पीड़न के मामले सामने आ रहे हैं, उसके लिए कहीं ना कहीं समाज भी जिम्मेदार है। इसके अलावा महिला पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाने के साथ महिला थाने में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।