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हड़ताल का मरीजों पर नहीं दिखा असर, नागरिक अस्पताल में भी सामान्य रही स्थिति

अंबाला : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर जिलेभर के निजी अस्पतालों में शुक्रवार को सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक हड़ताल रही। लेकिन इस हड़ताल का मरीजों पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला। क्योंकि निजी अस्पतालों में रोजाना की तुलना में महज पांच से दस प्रतिशत ही मरीज अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे, लेकिन उन्हें भी डॉक्टरों ने नागरिक अस्पतालों में भेज दिया। छावनी के डॉक्टर सुबह 11 बजे फीनिक्स क्लब में एकत्रित हो गए थे जहां उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा निजी अस्पतालों के लिए जारी किए जाने वाले क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 के विरोध में रणनीति तैयार की।

छावनी से आइएमए एसोसिएशन के प्रधान डॉ. प्रभाकर ने बताया कि क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 में कई ऐसे नियम है, जिन्हें अस्पताल संचालक पूरा करने में असमर्थ है। उन्होंने बताया कि एक्ट के तहत अस्पताल के आगे 40 फीट तक की सड़क होनी चाहिए। अस्पताल की 14 कारों की अपनी पार्किग होनी चाहिए। रिसेंप्शन पर कैंटीन की सुविधा, तीन एमबीबीएस डॉक्टर की उपलब्धता, आइसीयू की वीडियोग्राफी, मरीज के रजिस्ट्रेशन के समय एसपी विभाग की सहभागिता, अस्पताल के पड़ोसी से एनओसी सहित कई शर्ते हैं। इन्हें पूरा किया जाना मुश्किल होता है। इसके अलावा भी कई अन्य ऐसे नियम हैं।

सुबह से खाली रही कुर्सियां

उधर, छावनी के तकरीबन सभी निजी अस्पतालों में सुबह से ही काम बंद रहा। हालात यह थे कि मरीजों का चेकअप नहीं होने के कारण अस्पताल में सफाई अभियान चलाया गया। वहीं टेस्ट लैब भी बंद रही जिनमें निकलसन रोड स्थित कोस लैब में आधा शटर बंद रखा गया। डॉक्टरों ने अपने अस्पतालों के बाहर सुबह ही नोटिस चस्पा कर दिए गए थे। उधर, छावनी के नागरिक अस्पताल में पहले से हड़ताल को लेकर अतिरिक्त प्रबंध किए गए थे। यही कारण थे कि हड़ताल पर मरीजों का कोई असर देखने को नहीं मिला।