# बयान से पलटे करणी सेना प्रमुख ,पद्मावत देखने से इंकार         # अमेरिका में शटडाउन खत्म, राष्ट्रपति ट्रंप ने साइन किए बिल         # दिल्ली: राजपथ पर फुल ड्रेस रिहर्सल आज, कई जगह मिल सकता है जाम         # सेंसेक्स की डबल सेंचुरी, पहली बार 36000 के पार, निफ्टी ने भी रचा इतिहास         # सीलिंग के विरोध में दिल्ली के सभी बाजार आज रहेंगे बंद         # भारत-पाक बॉर्डर पर तनाव के बीच जम्मू कश्मीर में LOC के आर - पार बस सेवा फिर शुरू         # मिजोरम में शरण लिए म्यांमार के 1400 लोगों का देश लौटने से इनकार         # हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को देना होगा दहेज नहीं लेने का शपथ पत्र         # हरियाणा के कांग्रेस विधायकों को पार्टी फंड के लिए नोटिस         # दिल्ली एनसीआर में मौसम ने ली करवट, हल्की बारिश से ठंड की वापसी        
News Description
कभी खेड़ी महम की शक्कर होती थी मशहूर, आज गन्ने को भी तरस रहे बच्चे

महम : शहर से सटे एवं महम से गोहाना रोड पर पहला गांव खेडी महम जिसे लोग गांव खेडी ओघड़ से भी पुकारते हैं। वह जमाना भी था जब इसे शक्कर वाली खेड़ी भी कहा जाता रहा है। क्योंकि यहां की शक्कर दूर-दूर तक मशहूर होती थी। खेतों व गांव में लगे कोल्हू से शक्कर, खांड, गुड़ आदि लेने के लिए ऊंट गाड़ियों पर राजस्थान तक के व्यापारी आया करते थे।

यहां की जलवायु, उपजाऊ जमीन व नहरी पानी के ठाठ होने के कारण यहां के गन्ने में काफी मिठास पाया जाता था। जिसके कारण गुड़, शक्कर व खांड में काफी रावा पाया जाता था। इसलिए यहां की शक्कर मशहूर होती चली गई। तीन दशक पहले तक गांव शक्कर की मिठास के लिए दूर-दूर तक पहचाना जाता था। लगभग 300 साल पहले राजस्थान से आए लोगों द्वारा बसाया गया यह गांव बाद में ओघड़ वाली खेड़ी के नाम से जाना जाने लगा। आज इसे खेड़ी महम के नाम से जानते हैं।

बताते हैं कि राजस्थान से आकर बसे परिवार में धीरे-धीरे 21 सदस्य हो गए थे। समय ने ऐसी करवट बदली कि धाडूवों ने गांव में बसे महादेव के परिवार पर आक्रमण कर अधिकतर लोगों को मौत के घाट उतार दिया। जिसमें एक गर्भवती महिला की जान बच गई। महिला के गर्भ से एक लड़के का जन्म हुआ जिसका नाम सेबू रखा गया। सेबू से ही आगे का वंश चला।

जबकि इनके साथ-साथ दूसरे लोग भी गांव में आकर बसते चले गए। आज गांव में सभी बिरादरियों के लोग आपस में प्यार और सौहार्द से रह रहे हैं