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जिले में 33 डेंजर जोन, कहीं भी सांकेतिक बोर्ड नहीं, कई सड़कों से सफेद पट्‌टी गायब, यातायात व्यवस्था क

इस साल अब तक जिले में 400 से अधिक हुए सड़क हादसे, 387 की हुई मौतें, 299 घायल 

जिलेमें चरमराई यातायात व्यवस्था टूटी सड़कों के कारण हर रोज सड़क हादसे हो रहे हैं। सर्दी के सीजन में धुंध कोहरे का प्रकोप होने लगा है। अब धुंध के मौसम में सड़क हादसे कैसे रूक पाएंगे, यह यातायात पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। क्योंकि हादसे रोकने के लिए तो पुलिस का पूरा स्टाफ है और ही अन्य संसाधन। डेंजर पॉइंट्स पर सांकेतिक बोर्ड रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाए गए हैं। जो स्टाफ मौजूद है वह भी दिनभर वाहनों के चालान काटने में मशगूल रहता है। उन्हें वाहन चालकों की जान की सुरक्षा की कोई परवाह नहीं है। कई बार शिकायतें रहती हैं कि हादसा होने के बाद मृतकों के शवों घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए भी घंटों बाद एंबुलेंस पहुंच पाती है। सड़कों पर वाहनों के लिए सांकेतिक बोर्ड पट्टी आदि की पूरी व्यवस्था नहीं है। कई जगहों पर तो स्पीड ब्रेकर भी बिना निशान के बने हुए हैं। जो दुर्घटनाओं को बढ़ावा देते हैं। कई बसों में भी एक्सट्रा लाइटें लगवाई जा रही हैं, जिससे सामने वाले वाहन चालक को कुछ दिखाई नहीं देता। 

सबसेज्यादा हादसे दो पहिया वाहन चालकों के साथ होते हैं :जिले की सड़कों पर वर्ष 2017 में अब तक करीब 400 से अधिक हादसे दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों में करीब 387 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 299 घायल हो चुके हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि सबसे ज्यादा मौतें बाइक सवार, पैदल चलने वालों और कार सवार लोगों की हुई है। दुर्घटनाग्रस्त भी ज्यादातर दोपहिया वाहन चालक होते हैं। संबंधित थाना पुलिस ने इन मामलों में लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ केस दर्ज किए हैं। 

{सड़क पर चलते समया ट्रैफिक रूल्स को अपनाएं। 

{शराब पीकर गाड़ी चलाएं। वाहन चलाते समय मोबाइल पर बातें करें। 

{धुंध के समय अपने वाहन को साइड कम स्पीड में चलाएं। वाहन पर रिफ्लेक्टर अवश्य लगा होना चाहिए। 

{दोपहिया वाहन पर हेलमेट का प्रयोग अवश्य करें। अन्य वाहनों में सीट बेल्ट अवश्य लगाएं। 

{ सड़क पर दूसरे वाहन से उचित दूरी बनाकर चलें। रिफ्लेक्टर का इस्तेमाल करें। 

{प्रशासन की ओर से सड़कों, चौकों, चौराहों पर रिफ्लेक्टर साइन बोर्ड लगाने चाहिए। 

ब्रेकर भी पूरी तरह से नहीं बनवाए गए 

लगातारहो रहे सड़क हादसों को देखते हुए यातायात पुलिस ने जिले में 33 डेंजर जोन घोषित किए हुए हैं। जहां सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं। विशेष बात यह है कि इन डेंजर जोन पॉइंट्स पर भी हादसों को रोकने के लिए विभाग की ओर से सांकेतिक बोर्ड स्पीड ब्रेकर आदि भी पूरी तरह से नहीं बनाए गए हैं। कई सड़कों पर तो सफेद पट्टी भी नहीं है। जबकि धुंध आदि के मौसम में वाहन चालक इस पट्टी को देखकर अपने वाहन को चला पाते हैं।