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सचिवालय बने नहीं , चल रही गांवों की सरकार

पलवल: राजस्थान व गुजरात की तर्ज पर गांवों में ग्राम सचिवालय तो इसलिए बनाए गए थे, ताकि गांवों की सरकार वहां से चलाई जा सके तथा लोगों को सुविधाएं मिलें। बने सचिवालय अपने उद्देश्य में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। हालात यहां तक खराब हैं कि ज्यादातर सचिवालय सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। वहां बैठकर गांव की सरकार चलाना तो दूर महीनों-महीनों तक वहां कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं आता। सरपंच व ग्राम सचिव भी वहां नहीं झांकते। कुछ सचिवालय तो अवैध कब्जों के शिकार हैं। ज्यादातर सचिवालय सरकारी भवनों में स्थापित किए गए हैं। सरकार ने इन सचिवालयों में फर्नीचर भी उपलब्ध कराया है।

जिले में 45 ग्राम सचिवालय स्थापित किए जाने थे, जिनमें से अभी तक 21 सचिवालय ही स्थापित किए गए थे। इनमें गांव औरंगाबाद, सेवली, मानपुर, असावटा, जटौली, , रामगढ़, माहौली, पारौली, पेलक, आदूपुर,अलावलपुर, मंडकौला, डाडका, कोट, अच्छेजा, फिरोजपुर राजपूत, बामनीखेड़ा, रतिपुर, नंगला भीकू, भिडूकी गांव में ही ग्राम सचिवालयों स्थापित किए गए हैं।

जब सचिवालय बनाए गए थे तब सरकार की योजना थी कि इनमें प्रति दिन एक विभाग का कोई अधिकारी जाकर बैठे तथा ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करें। इसके अलावा ग्राम सचिव व पटवारी भी सचिवालय में बैठकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करे। कंप्यूटर आपरेटर वहां से ग्रामीणों की मांग के अनुसार जमीन की फर्द निकालना, इंतकाल चढ़ाना, आधार कार्ड व पेन कार्ड बनाना, आधार कार्ड से उनके खातों व अन्य जरूरी कार्यों को ¨लक करना, सरकारी नौकरियों में बेरोजगारों के आवेदन करवाने जैसी सुविधाएं दे सके।