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मरीजों को भर्ती करने के बजाय घर पर रखने की दे रहे सलाह

 गुरुग्राम: नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) से जुड़े छह सौ से अधिक कर्मचारी दस दिन से हड़ताल पर चल रहे हैं, जिसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। जिला अस्पताल में आए नवजात की गंभीर हालत को देखते हुए भी उन्हें दाखिल करने के बजाय घर पर ही रख कर दवा खिलाने की सलाह दी जाती है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने अपने स्तर पर मरीजों के लिए प्राइवेट एंबुलेंस सरकारी रेट पर उपलब्ध करा दी है। लेकिन निको वार्ड से लेकर गायनी वार्ड और एंबुलेंस सेवाएं मरीजों को ठीक से नहीं मिल पा रही हैं। एंबुलेंस के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है। क्योंकि जो प्राइवेट एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग के साथ जुड़ी भी हैं, वो अपनी बु¨कग को प्राथमिकता देती हैं। क्योंकि सरकारी बु¨कग में उन्हें सरकार द्वारा तय रेट मिलता और और खुद की बु¨कग में अधिक पैसा मिलता है।

स्पेशल नियोनेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) में डॉक्टर व अन्य स्टाफ नहीं होने के कारण परेशानी है। सुबह बच्चे को दिखाने आई तो बड़ी देर के बाद दाखिल किया गया। यहां एक ही डॉक्टर है। मेरे पास पैसा नहीं है कि किसी निजी अस्पताल में दाखिल कराया जा सके। मेरे बेटे का इलाज सरकारी अस्पताल पर ही निर्भर है।

- हेमा

मैं एसएनसीयू में अपने 12 दिन के बच्चे को डॉक्टर को दिखाने आई थी डॉक्टर ने दवा लिख दी और कहा इसे घर पर रखो। हम अपने यहां अधिक बच्चे नहीं रख सकते, क्योंकि यहां पर स्टाफ नहीं है।

- ¨रकी देवी

मेरे बेटे को दस्त आ रहे हैं। काफी इंतजार के बाद नंबर आया हालांकि डॉक्टर से जल्द ठीक होने का आश्वासन मिला है। डॉक्टरों ने कहा इसकी हालत दाखिल करने लायक है, मगर स्टाफ नहीं होने कारण नहीं कर सकता। मेरे बच्चे का घर पर इलाज चलेगा। डॉक्टर ने कल दोबारा इसीलिए बुलाया है ताकि बच्चे को जल्द देखा जा सके।

- बीना देवी

सरकार को हड़ताल खत्म करानी चाहिए। अधिकारियों व नेताओं को सोचना चाहिए कि मरीजों को कितनी परेशानी हो रही है। इस तरह के हालात देख लगता है किसी को मरीजों का ध्यान ही नहीं है। डॉक्टर है लेकिन गायनी वार्ड में स्टाफ कम होने कारण परेशानी है।

- शोभा देवी।