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राइट टू प्राइवेसी के दौर में इन्फार्मेशन सिक्योरिटी बेहद अहम

गुरुग्राम : सुप्रीम कोर्ट द्वारा राइट टू प्राइवेसी को मौलिक अधिकार का दर्जा देने के बाद इन्फार्मेशन सिक्योरिटी का मुद्दा काफी अहम हो गया है। इस प्रकार का डाटा चाहे व्यक्तिगत हो या किसी कंपनी या प्रतिष्ठान का इसकी गोपनीयता भंग होना काफी गंभीर हो गया है। यूं तो देश भर की इंडस्ट्री, कंपनी, संस्थान व प्रतिष्ठानों के डाटा पर हैकरों की नजर रहती है। समय-समय पर वह इन पर हमले करते रहते हैं। जिनकी सुरक्षा पुख्ता होती है वहां के डाटा हैक होने या नष्ट होने से बच जाता है। इन्फार्मेशन हैक होने का सबसे अधिक खतरा हमेशा आइटी इनेबल्ड कंपनियों को होता है।

यह बातें बृहस्पतिवार को होटल लीला एंबियंस में आयोजित तीन दिवसीय एनुअल इन्फार्मेशन सिक्योरिटी समिट 2017 के आयोजन के दौरान आइटी-आइटीईएस विशेषज्ञों ने कही। नेस्कॉम के प्रेसिडेंट आर. चंद्रशेखर का कहना है कि इस समिट के माध्यम से इन्फार्मेशन के विभिन्न ¨बदुओं पर चर्चा की जा रही है। आज के दौरान में सूचना एक अमूल्य भंडार है। सूचनाएं आज के दौर में दुनिया की सबसे मूल्यवान चीज है। इसलिए इसकी सुरक्षा बहुत जरूरी है। हर क्षेत्र की प्रक्रिया सूचना के डाटा पर चल रही है। जब से सूचनाएं डिजिटल हुई हैं तब से इनमें गत्यात्मकता तो आई है साथ ही साथ इसके लिए खतरे भी समानांतर बढ़ते जा रहे हैं। है¨कग आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती है। इसका दायरा भी बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि इसकी सुरक्षा को लेकर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में ¨चता भी बढ़ती जा रही है। मेइटी के सचिव अजय प्रकाश का कहना है कि वैश्विक दौर देशों के बीच बढ़ते जा रहे कारोबार को देखते हुए सूचना की गोपनीयता बनाए रखना समय की मांग है।

समिट में आए टेक्नोलॉजी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने बायो हैक्स के बारे में भी चर्चा की। एथिकल इनक्वायरी विषय पर डाटा सिक्योरिटी काउंसिल आफ इंडिया के सीनियर डायरेक्टर विनायक गोडसे ने प्रकाश डालते हुए कहा कि डाटा आज काफी संवेदनशील मुद्दा हो गया है। इसे किसी भी प्रकार से लीक कराया जा सकता है। छोटे पैमाने से लेकर बड़े पैमाने पर इसके साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। जरूरत है इस बारे में अधिक से अधिक जागरूक होने की। हैकाथोन का भी आयोजन किया गया। जिसमें गे¨मग इंडस्ट्री से जुड़े पहलुओं को दर्शाया गया है।