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बहादुरगढ़ में मेट्रो यार्ड को जाने वाली लाइन की जमीनों के अधिग्रहण की कार्रवाई फिर से शुरू

मेट्रोके फेज तीन के तहत मुंडका से बहादुरगढ़ के बीच बनाए जा रहे नए सेक्शन पर मेट्रो का ट्रायल रन अब तेजी से चलने लगा है। पर यहां सेक्टर नौ में मेट्रो यार्ड की लाइन तैयार नहीं होने के कारण इस बेल्ट में कॉरिडोर पैसेंजर्स के लिए कब खुलेगा, इस बारे में डीएमआरसी भी यकीन के साथ कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। इसके पीछे कारण है कि सेक्टर नौ यार्ड के लिए मिलने वाली जमीन पर सरकार अभी तक कोई हल नहीं निकाल पाया है। यहां हुडा विभाग ने मेट्रो को जमीन अधिग्रहण करके देनी थी जिसके लिए हुडा विभाग ने सर्वें किया तो हाइवे के शोरूमों को खेत की जमीन मानते हुए यहां की शोरूमों का मुआवजा खेतों के हिसाब से तय कर दिया। इसके विरोध में व्यापारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया। अब एक बार फिर से हुडा विभाग ने जमीन का अधिग्रहण करने की तैयारी शुरू की है पर व्यापारियों का कहना है कि यहां एक बार फिर से हुडा अधिकारी नए नए पेंच फंसाने की तैयारी में जुट गए हैं जिससे मेट्रो के यार्ड की लाइन का काम और देरी से शुरू हो सके। इस कारण वे एक बार फिर से अदालत के द्वार खटखटाने की तैयारी में है। 

हाई कोर्ट से अधिग्रहण प्रक्रिया को गलत ठहराने के बाद दोबारा की थी पैमाइश 

27सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की डबल बैंच में शामिल जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस गुरविंद्र सिंह गिल ने मेट्रो यार्ड की इस जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया को ही गलत ठहरा दिया था। हाई कोर्ट की डबल बैंच ने मामले का निपटारा करते हुए फैसला करते हुए सरकार को इस जमीन का नए सिरे अधिग्रहण करने या दुकानदारों को मनाने के लिए छह माह का समय दिया था। दो माह से ज्यादा का समय हो चुके है अब सिर्फ साढ़े तीन माह का और समय शेष है। हुडा ने मेट्रो अधिकारियों को दोबारा से पैमाइश कराने प्रोजेक्ट के लिए वास्तविक जमीन का ही अधिग्रहण करने के निर्देश दिए थे। 

पहले था 4200 वर्ग का प्रोजेक्ट, अब घटकर हुआ 2632 वर्ग गज 

सेक्टर9 बाईपास पर जमीन का मसला कई सालों से अटका हुआ है। जब बात अधिग्रहण की चली तो यहां पर पहले 4200 वर्ग गज जमीन चाहिए थी। मामला अटकता देख मेट्रो अधिकारियों ने पिछले दिनों इस प्रोजेक्ट को कम कर दिया था। इसी के चलते पैमाइश की गई थी। अब पैमाइश रिपोर्ट हुडा के संपदा अधिकारी को सौंप दी गई है। इसमें यह प्रोजेक्ट 4200 वर्ग गज की बजाय 2632 वर्ग गज ही रह गया है। 

मेट्रो ने जून 2018 तय कर रखी है डेडलाइन 

जमीनके अधिग्रहण में फंसे पेंच की वजह से मुंडका-बहादुरगढ़ मेट्रो की डेडलाइन कई बार खिसक चुकी है। पिछले दिनों मेट्रो ने यहां पर ट्रेन चलाने के लिए जून 2018 की डेडलाइन तय की थी। इसी के चलते करीब एक सप्ताह पहले ओएचई का ट्रायल शुरू किया गया है। अब इसे मार्च में चलाने की तैयारी है पर यह मेट्रो यार्ड की लाइन का विवाद कैसे हल होगा इसे लेकर अधिकारी कोई दावा नहीं कर रहे। 

यह है परेशानी का कारण 

सेक्शनको पैसेंजर्स के लिए शुरू करने में एक समस्या यह भी है कि यह सेक्शन इंद्रलोक और कीर्ति नगर से मुंडका के बीच बनाए गए सेक्शन का ही एक्सटेंशन है। अभी यहां की ट्रेनों का मेंटनेंस और रिपेयर वर्क मुंडका डिपो में होता है। बहादुरगढ़ तक इस लाइन के विस्तार के साथ ही मेंटनेंस और रिपेयर वर्क के लिए बहादुरगढ़ में भी एक डिपो बनाया जा रहा है, लेकिन अभी तक इसके लिए हुडा विभाग हाइवे पर जमीन का अधिग्रहण ही नहीं कर पाया है। ऐसे में ट्रायल रन पूरा होने के बाद भी यहां सर्विस कब शुरू होगी, कहना मुश्किल है। मेट्रो प्रवक्ता के मुताबिक, ट्रायल रन के दौरान ट्रेनों का इंटरफेस चेक किया जाएगा।