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स्वागत गीत के लिए कड़ाके की ठंड में तीन घंटे नंगे पांव खड़े रखे सैकड़ों बच्चे

अंबाला शहर शुक्रवार को शहर स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में तीन दिवसीय डीएवी नेशनल खेल शुरू हुए। इस मौके पर हाड़ कंपाने वाली सर्दी के साथ आयोजकों की लापरवाही व बदइंतजामी ने विद्यार्थियों की हालत पतली करके रख दी। शीत लहर के बीच जहां गर्म कपड़े पहन कर भी खुले मैदान में खड़ा नहीं हुआ जा रहा था वहां, बरसात से गीले हुए मैदान में स्वागत गीत व अन्य प्रस्तुति देने के लिए सैकड़ों बच्चों को बिना स्वेटर व जर्सी के लगभग तीन घंटे पहले नंगे पांव खड़ा कर दिया गया। जब डीएवी मैने¨जग कमेटी दिल्ली से लेकर पुलिस प्रशासन के बड़े अफसर शूट बूट में मंच पर पहुंचे तो नजारा देखते रहे और किसी को बच्चों की हालत पर तरस नहीं आया। जब अभिभावकों से अपने लाडले लाडलियों की यह हालत देखी नहीं गई तो वह अपनी जैकेट उतार कर बच्चों को पहनाने की कोशिश में दिखे। दूसरी ओर बच्चे खुद को गर्म करने के लिए कभी हाथ रगड़ रहे थे तो कभी गीली जमीन से पांव ऊपर उठा रहे थे। घास के मैदान में दरियां तक नहीं बिछाई गई थी। हालांकि, सब अनदेखा कर गए। वहीं, अभिभावकों का गुस्सा इस कद्र था कि उन्होंने खुद ही अपने अपने मोबाइल से अपने बच्चों की हालत की वीडियो बनाई ताकि वह स्कूल को कटघरे में खड़ा कर सकें।

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मुख्यातिथि खुद नंगे पावं खड़ा होकर दिखाएं

अभिभावक चेतना ने बताया कि जो मुख्य मेहमान आए हैं वह यहां आकर खुद खड़े हों और फिर बताएं कि उन्हें कैसे लगता है। उनके बच्चे दो घंटे से खड़े हैं न पैर में जूते हैं और न स्वेटर है। अधिकारी इन बच्चों की तरह जूते स्वेटर उतार कर खड़ा हों फिर उन्हें पता लगेगा कि कैसा लगता है।

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सुबह आठ बजे से खड़े हैं बच्चे

अभिभावक पुष्पा ने बताया कि इन बच्चों की ठंड में ठीक से देखभाल तो क्या करनी थी बल्कि सुबह आठ बजे से नंगे पांव ठंड में खड़ा कर दिया है। इन्हें महसूस नहीं होता। खुद खड़ा होकर देखें तो इन्हें पता चल जाएगा कि कितनी ठंड है।

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जिससे बात करते हैं वह इधर उधर निकल लेता है

अभिभावक जुगल किशोर के मुताबिक हवा इतनी ठंडी है कि उन्हें कोट व स्वेटर में भी ठंड लग रही है और बच्चे नंगे पांव जमीन पर खड़े हैं। जब वह इस मामले में टीचर्स से बात कर ¨प्रसिपल का नंबर मांगते हैं तो वह इधर उधर निकल जाते हैं।

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दो घंटे से बच्चों की तरफ कोई नहीं देख रहा

अभिभावक रजनीश ने बताया कि दो घंटे से वह कार्यक्रम में मौजूद है और उसके बच्चे इतने से समय से ही ठंड में नंगे पांव खड़े हैं। बच्चों की तरफ कोई देख ही नहीं रहा है। बच्चों के साथ यह सब ठीक नहीं हो रहा और बच्चे बीमार पड़ेंगे।

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यह बाल क्रूरता से जुड़ा मामला है, कार्रवाई करेंगे

इस मामले में राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग के सदस्य परमजीत ¨सह बड़ौला के मुताबिक यह मामला बाल क्रूरता से जुड़ा है। बच्चों को इस तरह प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के सेक्शन 75 के तहत कार्रवाई बनती है। आयोग एक्ट के सेक्शन 13 में ऐसे मामलों पर कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।