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एकादशी व्रत से दुष्ट भी भगवान प्राप्त कर लेते है : कृष्णाचार्य

पूंडरी |ठाकुर द्वारामंदिर सेठ दाना मल पूंडरी में आयोजित लक्ष्मी नारायण यज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में संदीप सिंगला ने प|ी समेत यज्ञ में हिस्सा लिया आहुति प्रदान की। यज्ञ ब्रह्मा कृष्णाचार्य ने देव मंत्रों के साथ यज्ञ में आहुति डलवाई तत्पश्चात एकादशी महात्म की कथा श्रवण की। कथा में आचार्य ने बताया की प्राचीनकाल में एक पापी लुम्पक को पिता ने राज्य से निकाल दिया। वन में वह बहुत दुखी हुआ और उसे कुछ खाने को भी नहीं मिला। अनजाने में उस दिन एकादशी शफला का व्रत हो गया। इससे भगवान खुश हो गए और आकाशवाणी हुई कि जाओ अब तुम्हारे पिता माफ कर देंगे। व्रत के प्रभाव से पिता उससे खुश होकर उसे राज्य भार सौंप दिया और खुद वन में चले गए। शफला व्रत के प्रभाव से लुम्पक के जन्मों के पाप भी नष्ट हो गए। वह राक्षस प्रवृति को छोड़कर देव भगत हो गया। मरने के बाद सीधे बैकुंठधाम को गया।