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43 डिब्बों से से शुरू किया था मधुमक्खी पालन, अब हर साल कमाते हैं 24 लाख

गांव घुक्कांवाली के किसान गुरसेवक सिंह के जीवन में मधुमक्खी पालन व्यवसाय ने खुशियों की मिठास घोली है, क्योंकि 8वीं पास किसान के पास सिर्फ 5 एकड़ भूमि है, लेकिन कम भूमि की आमदन से परिवार का गुजारा मुश्किल था, 4 वर्ष पहले उसने खेती के साथ मधुमक्खी पालन व्यवसाय को अपनाया, तो अब वह खेती से तीन गुणा आमदन मधुमक्खी पालन व्यवसाय से लेता है। किसान की इस उपलब्धि से प्रेरित आसपास के किसानों ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय को अपनाया है।


चार साल पहले वह घाटे का सौदा बनी खेती से आहत होकर कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचा, जहां विज्ञानिकों ने उसको खेती के साथ मधुमक्खी पालन व्यवसाय बारे जानकारी दी। ट्रेनिंग लेकर 43 डिब्बों से मधुमक्खी पालन व्यवसाय की शुरुआत की। अब उसके पास 435 डिब्बे हैं। मुधमक्खी व्यवसाय से सालाना 196 क्विंटल शहद का उत्पादन करता है। शहद के कारोबार से उसको 24 लाख की वार्षिक आमदन होती है। वहीं जल्द ही ऑटोमेटिक शहद प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की योजना बना रहा है।

खेत में ही करते हैं पैकिंग: गुरसेवक सिंह ने बताया कि एक बक्से में पांच से सात हजार मधुमक्खियां रहती हैं। इसमें एक रानी मधुमक्खी और कुछ ड्रोन (नर मधुमक्खी) व वर्कर मधुमक्खी होती हैं। आम तौर पर जनवरी-फरवरी से अप्रैल-मई तक खेतों ओर बगीचों में बक्से रखे जाते हैं। तीन किमी की रेंज से मधुमक्खियां फूलों से रस लाकर बक्से के छत्ते में भरती हैं। रानी मधुमक्खी अंडे देती है। वर्कर मधुमक्खियां अपने पंख से लाए रस को झेलते हुए पानी सुखाती हैं और मधु तैयार होता है। छत्ते से मधु निकाल कर पैकिंग की जाती है। किसान ने बताया कि वह गंगानगर व बठिंडा में शहद की मार्केटिंग करता है।

व्यवसाय के लिए चार प्रकार की मधुमक्खियां

एपिस इंडिका, एपिस मेलिफेरा, डोरसेटा, एपिस सेराना और स्टिगलेस मधुमक्खी प्रयोग होती है। एपिस मेलिफेरा मधुमक्खी अन्य की अपेक्षाकृत बड़ी होती है। मधु उत्पादन अधिक मिलता है। मधुमक्खी पालन के लिए लकड़ी का बॉक्स, बॉक्सफ्रेम, मुहं पर ढकने के लिए जालीदार कवर, दस्ताने, चाकू, शहद, रिमूविंग मशीन, शहर एकत्रित करने के लिए ड्रम की आवश्यकता रहती है।

शहद का प्रयोग कई प्रोडक्ट्स बनाने में होता है

शहद खांसी व दमा में उपयोगी होता है। यह एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है। इसमें विटामिन, ग्लूकोज, फ्रक्टोज, पोटैशियम, कैल्सियम, सल्फर, फास्फेट, जिंक व आयरन खनिज तत्व होते हैं। आंखों की रोशनी तेज करने व श्वास संबंधी बीमारी दूर करने में उपयोगी है। दवा, क्रीम, ऑयल बनते हैं, मोटापा कम करने, घाव ठीक करने और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी प्रयोग होता है।