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नंदीशालाओं में शेड नहीं, ठंड से बीमार होकर हर दिन मर रहे बछड़े और सांड

फतेहाबाद ठंडकी दस्तक नंदीशालाओं में बछड़ों सांडों पर भारी पड़ती नजर रही है। फतेहाबाद आसपास गांवों की नंदीशालाओं में हर रोज 4-5 पशु मर रहे हैं। हालांकि बड़े सांडों द्वारा खुले घूमते समय खाया गया पॉलीथीन भी एक कारण है। हालांकि सर्दी के मौसम में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए अब तक केवल कुछ ही नंदीशालाओं ने प्रबंध किए। 

प्रदेश सरकार ने फतेहाबाद जिले को 28 फरवरी 2017 को कैटल फ्री जिला घोषित कर दिया। इससे पहले जिलेभर में करीब 5600 सांड गली-मोहल्लों में घूम रहे थे। कैटल फ्री अभियान के तहत इन पशुओं को पकड़कर नंदीशालाओं में बंद कर दिया। एडीसी डाॅ. जेके आभीर ने इसके लिए गांव स्तर पर जागरुकता अभियान चलाया और गांवों में ग्रामीणों के सहयोग से नंदीशालाएं खुलवाई। 

अबजिले में हैं 10 हजार से अधिक सांड 

जिलाप्रशासन द्वारा जिलेभर से 10 हजार 612 सांडों को सड़कों से पकड़कर नंदीशालाओं में रखा गया है। ये पशु 18 नंदीशालाओं में है। प्रशासन लगातार पशुओं को पकड़कर नंदीशालाओं में पहुंचा रहा है। बीती 30 जून तक 8129 पशुओं को पकड़ा जा चुका है। इन पशुओं को टोहाना, रतिया, भूना, भट्टूकलां, काजलहेड़ी, खाराखेड़ी, भोडा होशनाक, मानावाली, चुलीकलां, खाबड़ाकलां, सोत्तर भट्टू, शेखुपुर सोत्तर, एमपी रोही, ठुइयां, ढाबी खुर्द चिंदड़ की नंदीशालाओं में रखा गया है। कई नंदीशालाओं में पशुओं की संख्या के अनुसार शेडों की कमी है। जबकि कई नंदीशालाओं में तिरपाल आदि की व्यवस्था होने से बछड़े सांड बीमार हो रहे है। 

हरमाह औसतन 150 पशु मर रहे 

मृतकपशुओं को उठाने वाले ठेकेदार बलविंद्र सिंह ने बताया कि उसके पास फतेहाबाद शहर साथ लगते गांव बीघड़, मानावाली, भोडियाखेड़ा, खैरातीखेड़ा का ठेका है। इन नंदिशालाओं गोशालाओं में हर रोज 4-5 पशुओं की मौत हो रही है। ठंड के कारण बछड़े सांडों मर रहे है। हालांकि सांडों ने खुले में घूमते समय पॉलीथीन का सेवन किया था और अब ठंड में बीमार पड़ने साथ-साथ पेट में पॉलीथीन की गांठें बनने से वे मर रहे है। उन्होंने दो दिन में गांव खैरातीखेड़ा से एक, भोडियाखेड़ा से दो, मानावाली से दो, फतेहाबाद से एक पशुओं को उठाया है। हर माह औसतन 150 पशु मर रहे है। 

बीमारपशुओं के लिए लगाए तिरपाल 

बीघड़रोड पर स्थित श्रीकृष्ण प्रणामी नंदीशाला में अभी 10-15 पशु बीमार है। नंदीशाला के मैनेजर प्रेम कुमार ने बताया कि इन पशुओं की अच्छी देखभाल के लिए प्लास्टिक के कट्टों की तिरपाल बनाकर शेड पर लगा दी है। ताकि ठंड से पशु और अधिक बीमार पड़े। इसकी देखभाल पशुपालन विभाग के चिकित्सक द्वारा की जा रही है। 

जिले में बड़ी नंदीशालाओं में सांडों की हालत खराब 

पशुओं के प्रति प्रशासन पूरी तरह से संवेदनशील : डीडीपीओ 

डीडीपीओ राजेश खोथ ने बताया कि 22 नंदीशालाओं में सांडों के लिए शेड बनवा दिए गए हैं और 7-8 नंदीशालाओं में शेड बनने बाकी है। यहां के पशुओं के लिए अस्थाई तौर पर तिरपाल लगाकर सर्दी से बचाव के आदेश दे दिए है और शेड बनाने का काम तेजगति शुरु करवा दिया है। पशुओं के प्रति प्रशासन पूरी तरह से संवेदनशील है। 

नंदीशाला सांड 

फतेहाबाद1198

रतिया417

भूना476

भट्टूकलां353

काजलहेड़ी270