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दैनिक जागरण के 75 साल: दैनिक जागरण से शहर का जागरण होता है

गुरुग्राम के सेक्टर चार में रहने वाले डॉ. नंदलाल मेहता वागीश का भाषा और साहित्य में योगदान अप्रतिम रहा है। 77 वर्षीय डॉ. मेहता उम्र के इस मोड़ पर भी भाषा को समृद्ध करने में निरंतर जुटे रहते हैं। डॉ. वागीश काव्य गोष्ठियों, परिचर्चा, पुस्तकों के विमोचन जैसे कार्यक्रमों में बहुत ही गर्मजोशी से हिस्सा लेते हैं। हरियाणा प्रदेश को उनकी समृद्ध भाषा और भाषा को लेकर उनके उदार ²ष्टिकोण का लाभ मिला हैं। इस साल उन्हें हरियाणा साहित्य अकादमी का सर्वोच्च पुरस्कार महाकवि सूरदास आजीवन साहित्य साधना पुरस्कार दिया गया है। ¨हदी और भारतीय भाषाओं पर इन्होंने कई शोध भी किए हैं। इन्होंने डॉ. वागीश ने 33 वर्ष तक स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं में अध्यापन किया है। व्याकरण, भाषा विज्ञान, काव्य शास्त्र, समीक्षा, व्यंग्य लेखन, ¨चतन, संस्कृति, अध्यात्म पर दो दर्जन से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

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जब दैनिक जागरण के गुरुग्राम संस्करण की शुरुआत हुई थी तो उस समय आदरणीय नरेंद्र मोहन जी यहां आए थे। मैं भी उस कार्यक्रम के आमंत्रित अतिथियों में था और मैंने भी अपनी बात रखी थी। दैनिक जागरण से शहर का जागरण होता है। सुबह सबेरे जागरण सबको चाहिए। मैं दूसरे अखबारों के मुकाबले देखता हूं तो कुछ बातें ऐसी हैं जो दैनिक जागरण को अन्य से अलग करती हैं। अब तक दैनिक जागरण में भाषा का प्रदूषण नहीं हुआ है। कई अखबारों ने ¨हदी भाषा को विकृत किया है। दैनिक जागरण ने मानक को बनाए रखा है। दूसरे खबरों की प्राथमिकता के लिहाज से भी राष्ट्रीय मनोभाव को दैनिक जागरण ने समझा है। हमारी भावनाएं राष्ट्रीय हों, यह हम अपने देश पर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं। यह हमारा राष्ट्र के प्रति कर्तव्य है। राष्ट्रीय भावनाओं से पाठकों का जुड़ाव हो इसके लिए दैनिक जागरण ने काम किया है। सकारात्मकता के साथ राष्ट्रीय भावनाएं लोगों तक पहुंचाई हैं। 75 वर्ष का समय कोई छोटा समय नहीं होता। इतने समय तक पत्रकारिता के स्तर को बनाए रखना, सामाजिक सरोकारों और मुद्दे को केंद्र में रखना, भाषा के संस्कार को बनाए रखना बड़ी बात है। मुद्दे विमर्श का विषय हों यह जरूरी है। राष्ट्रहित के लिए सकारात्मक विचारधारा लोगों तक पहुंचने और देश के प्रति सकारात्मक राय कायम करने में दैनिक जागरण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्षों से मेरी सुबह दैनिक जागरण के साथ होती है। मैं इसमें खबरों के अलावा संपादकीय लेखों और साहित्य के पन्ने को पढ़ता हूं। दैनिक जागरण विभिन्न आयोजनों के माध्यम से भी लोगों के बीच होता है। यह एक बहुत अच्छी बात है। मैं यह उम्मीद करता हूं कि दैनिक जागरण अपने स्तर को आगे भी बनाए रखेगा। 75वीं वर्षगांठ पर अनंत और अशेष शुभकामनाएं देता हूं।