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एनजीटी ने 460 फैक्ट्रियों पर लगाया 1.90 करोड़ रुपये जुर्माना

औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर सख्त रुख अपनाते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को भिवाड़ी की रेड व ऑरेंज कैटेगरी की 460 फैक्ट्रियों पर एक करोड़ 90 लाख रुपये का जुर्माना किया।

एनजीटी ने औद्योगिक क्षेत्र की गंदे पानी की समस्या के स्थाई समाधान के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने के आदेश दिए हैं। एनजीटी की ओर से नियुक्त कमिश्नर सुमित सोढ़ी ने गत माह भिवाड़ी के बोरवेल व हैंडपंप के पानी का नमूना लिया था। एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट में उन्होंने बोरवेल व हैंडपंप के पानी को पीने योग्य नहीं बताते हुए सख्त टिप्पणी की थी। जुर्माना राशि का उपयोग लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने पर खर्च किया जाएगा।

भिवाड़ी व धारूहेड़ा में भूजल प्रदूषण को लेकर मई 2015 में धारूहेड़ा की सुमित्रा मुकदम, इंद्रपाल मुकदम व भिवाड़ी के लक्ष्मण राघव ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। मंगलवार को दोनों याचिकाओं का निस्तारण करते हुए एनजीटी ने भिवाड़ी के उद्योगों को दूषित पानी छोड़ने का दोषी पाया और रेड कैटेगरी के उद्योगों को पचास-पचास हजार व ऑरेंज कैटेगरी के उद्योगों पर तीस-तीस हजार रुपए का जुर्माना लगाया।

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अनुमति लेकर व पर्यावरण के नियमों का पालन करके ही फैक्ट्रियों का संचालन किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में रेड कैटेगरी की 260 व ऑरेंज कैटेगरी में 200 फैक्ट्रियां हैं। रेड केटेगरी में सीमेंट, फार्मा कम्पनी, केमिकल व रबर की फैक्ट्रियां हैं, जिनमें केमिकल का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है जबकि ऑरेन्ज केटेगरी में ़फूड प्रोसे¨सग, छोटी प्लास्टिक की फैक्ट्रियां सहित वे फैक्ट्रियां शामिल हैं, जिनमें प्रदूषण रेड केटेगरी की अपेक्षा कम होता है।