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अब स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू करने की मांग क्यों नहीं करते भाजपा विधायक

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा ने कहा कि भाजपा के विधायक अब स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग क्यों नहीं करते हैं। पहले अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने वाले यही भाजपाई अब पूरी तरह खामोश हो चुके हैं। अगर वही नेता अब विधानसभा में भी इस मुद्दे पर अर्धनग्न होकर आए तब मानेंगे कि उन्हें किसानों के हितों की ¨चता है।

हुड्डा शुक्रवार को अनाज मंडी में सिरसा व फतेहाबाद जिले की किसान पंचायत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिदिन 35 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इससे ज्यादा बुरा हाल किसान का क्या होगा?

अपना घोषणा-पत्र ही लागू नहीं कर रही भाजपा

उन्होंने कहा कि भाजपा अपना घोषणा पत्र ही लागू नहीं कर पा रही है। चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में 154 वायदे किए थे, लेकिन सरकार को तीन साल पूरे होने वाले हैं और अभी तक एक भी वायदा पूरा नहीं हुआ है। गेहूं के भाव को 2100 रुपये करवाने के लिए मौजूदा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और कृषि मंत्री अर्धनग्न होकर प्रदर्शन कर रहे थे। उस हिसाब से तो आज 2600 रुपये समर्थन मूल्य होना चाहिए।

2005 से पहले फसली ऋण पर 11 फीसद लगता था ब्याज

हुड्डा ने कहा कि 2005 में हमारी सरकार आने से पहले जब किसान बैंक से फसली ऋण लेता था तो 11 फीसद ब्याज लगता था और कॉ आपरेटिव बैंक की जीप पीछे-पीछे होती थी। हमने कॉ-आपरेटिव बैंक के ऋण को माफ करने के लिए कदम उठाए। पूरे देश में ऋण पर ब्याज कम करवाया। जब पूरे देश में 4 फीसद हुआ तो हमारी सरकार ने जीरो फीसद कर दिया। मगर अब किसान की स्थिति भाजपा सरकार ने बदहाल कर दी है। पूरे देश के किसान पर साढ़े 12 लाख करोड़ रुपये का कर्जा चढ़ा हुआ है।

चार कंपनियों को 21 हजार करोड़ का लाभ पहुंचाया

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों को खूब लाभ पहुंचाया है। मात्र दो फसली सीजन में ही चार निजी कंपनियों ने 21 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसानों को बिना पूछे ही उनका पैसा काटा जा रहा है। किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच चुका है।

शायराना अंदाज में पेश आए पूर्व मुख्यमंत्री

किसान पंचायत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शायराना अंदाज में पेश आए। उन्होंने कहा कि सिर पर ताज उसी को मिलता है, जिसके पैरों में झाले हो। संघर्ष कभी हारता नहीं है। उन्होंने किसानों को समर्पित करते हुए पंक्तियां पढ़ी कि किसान बेचारा नहीं है, किसान बेसहारा नहीं है, किसान चुप है, गूंगा नहीं है, इन खामोशियां में तूफान छुपा है, किसान सोया हुआ है, किसान मरा नहीं है।

किसान आमदनी आयोग बनाने की उठी मांग

पंचायत में पूर्व ओएसडी डॉ.केवी ¨सह ने मांग उठाई कि कर्मचारियों की तर्ज पर देश व प्रदेश में किसानों के लिए भी आमदनी आयोग बनना चाहिए। जो तय करे कि किसानों की कमाई 30 हजार रुपये मासिक हो। उन्हें भी भत्ते मिलने चाहिए। उनका जरिया ही कृषि पर आधारित है। उन्होंने कहा कि देश में 62 फीसद रोजगार खेती से है। इसके बावजूद किसान की सालाना आमदनी 20 हजार रुपये है। उन्होंने कहा कि 3 लाख 80 हजार लोग खेती को छोड़ चुके हैं। खेती को बचाने व देश के सबसे बड़े रोजगार के साधन के लिए कारगर योजना लागू करनी होगी।

पूर्व सांसद ने भीड़ से दिलाया संघर्ष में साथ का वादा

पूर्व सांसद रणजीत ¨सह अपने चिर-परिचित अंदाज में दिखे। भीड़ जुटाने में आगे रहने वाले पूर्व सांसद ने किसान पंचायत का मांग-पत्र तो रखा ही साथ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा व अन्य वक्ताओं को विश्वास दिलाया कि सिरसा का कमेरा वर्ग आज भी उनके साथ खड़ा है। उन्होंने भीड़ को खड़े होकर संघर्ष का साथी बनने का आह्वान किया तो पूरे पंडाल में जोश भर गया। उन्होंने कहा कि किसानों ने बैंक से कर्जा ले रखा है। अगर मौजूदा नीतियां ही रही तो अगले पांच साल में किसानों का कर्ज उनकी जमीन के भाव जितना हो जाएगा।

इन्होंने भी किया संबोधित

किसान पंचायत को राज्यसभा सांसद शादीलाल बतरा, पूर्व मंत्री परमवीर ¨सह, प्रहलाद ¨सह गिल्लाखेड़ा, भरत ¨सह बैनीवाल, विधायक गीता भुक्कल, शकुंतला खटक, पूर्व स्पीकर रघुबीर कादियान, प्रोफेसर संपत ¨सह, जयवीर बाल्मीकि, जरनैल ¨सह, पूर्व मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा के बेटे महादेव शर्मा ने भी संबोधित किया जबकि मंच संचालन होशियारी लाल शर्मा ने किया।

ये रहे उपस्थित

इस मौके पर पूर्व विधायक रामनिवास घोड़ेला, विनोद भयाणा, रामभगत शर्मा, राजकुमार शर्मा, भूपेंद्र कासनिया, राजेंद्र आदमपुर, रण¨सह मान सहित सिरसा व फतेहाबाद से आए अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

ये रही झलकियां

- चौ.रणजीत ¨सह बार-बार हाथ जोड़कर भीड़ को बिठाने में लगे रहे

- भरत ¨सह बैनीवाल ने ठेठ देशी अंदाज में लोगों को खूब गुदगुदाया

- दीपेंद्र हुड्डा के भाषण के दौरान शुरु हुई बरसात