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सरकार और कर्मचारियों की लड़ाई में पिस रहे मरीज

नूंह : नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बिखरती नजर आ रही है। मरीज व तीमारदार भारी परेशानी से जूझ रहे हैं। सर्दी के मौसम से अस्पतालों में मरीजों की तादाद बढ़ती देखी जा रही है, लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के चलते इलाज समय पर नहीं हो पा रहा है।

ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जाकर इलाज कराना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोग वायरल बुखार, जुकाम, खांसी और टाइफाइड आदि बीमारियों की समस्या से जूझ रहे हैं। सरकार और एनएचएम कर्मचारियों की लड़ाई में मरीजों को पिसना पड़ रहा है। एंबुलेंस आदि सुविधाओं से भी मरीजों को वंचित रहना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों में पैसा खर्च करना पड़ रहा है। यहीं हालात रहे तो स्थिति और भी बद से बदतर होने लगेगी। इलाके गरीब लोग सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं पर ही निर्भर है। निजी अस्पतालों में इलाज कराने को इतना पैसा नहीं है। ऐसे में गरीबी से जूझ रहे लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं बिखरने पर गहरा असर पड़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों को सुबह-शाम देखा जा रहा है। मरीज इलाज के लिए तरस रहे हैं, लेकिन इलाज नहीं हो पा रहा है। सरकार द्वारा समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा। कर्मचारियों के काम पर न होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाती नजर आने लगी है। सरकार द्वारा प्रदेश के 10 हजार एनएचएम कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है।

ऐसी स्थिति में जिले की स्वास्थ्य सेवाएं भी चौपट होती दिखाई दे रही है। एनएचएम कर्मचारियों की मांगें पूरी न करने व बर्खास्त करने पर जिला नागरिक अस्पताल में सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री पुतला फूंक कर्मचारियों ने रोष प्रकट किया