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हड़ताली कर्मियों के साथ आ सकते हैं पक्के कर्मचारी

सोनीपत : समान काम, समान वेतन की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे एनएचएम कर्मचारियों को सरकार ने बर्खास्त कर दिया है। इससे सिविल अस्पताल की सुविधाएं चरमरा गई हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव लेबर रूम में होने वाली डिलीवरी और एंबुलेंस सुविधाओं पर पड़ा है। इसके अलावा आने वाले दिनों में इन कर्मचारियों को वापस नहीं किया तो इमरजेंसी सहित अन्य सेवाओं में लगे पक्के एनएचएम कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल हो सकते हैं। इससे अस्पताल की स्थिति और भयावह हो सकती है।

हड़ताल पर बैठे हरियाणा एनएचएम कर्मचारी संघ के मीडिया प्रभारी रवि पन्नू ने बताया कि वह किसी आश्वासन पर हड़ताल को खत्म नहीं करने वाले हैं। उनमें से अधिकतर कर्मचारियों को काम करते हुए दस वर्ष से अधिक हो चुके हैं। इसके बावजूद उनका वेतन दस से पंद्रह हजार रुपये तक ही पहुंच पाया है। स्वास्थ्य विभाग को किसी विभाग में कर्मचारियों की जरूरत है तो वह एनएचएम को ही पक्के तौर पर शामिल करके उनके अनुभव का भी फायदा उठा सकती है और इससे कर्मचारियों का भविष्य भी सुरक्षित होगा। इसलिए जब तक कोई विभागीय मंत्री या सिविल सर्जन उनकी मांगे पूरी करने के बारे में लिखित में कुछ नहीं देगी तब तक वह इसी तरह हड़ताल पर बैठे रहेंगे।

इसी के साथ हड़ताल पर बैठे कर्मचारी इमरजेंसी विभाग में कार्यरत एनएचएम व अन्य पक्के कर्मचारियों को भी अपने साथ मिलाने के प्रयास में है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर इनकी मांगे नहीं मानी जाती है और इन्हें वापस नहीं लिया जाता है तो ये पक्के कर्मचारी भी उनके समर्थन में आ सकते हैं।

सिविल अस्पताल के लेबर रूम में करीब 80 प्रतिशत काम एनएचएम कर्मचारियों के कंधों पर ही होता है। इनमें से अधिकतर कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रसूति विभाग की एक कर्मचारी ने बताया कि आजकल सामान्य तौर पर एक रात में 15 से 17 डिलीवरी केस आ रहे हैं। इस विभाग का अधिकतर काम एनएचएम कर्मचारी ही संभालती हैं। अब उनकी गैरमौजूदगी में अन्य विभागों से कर्मचारी बुलाए जाने के बावजूद काम नहीं चल पा रहा है। मरीज के गंभीर होने पर भी उसे इंतजार करना पड़ रहा है।