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सीएलयू के लिए कागजों में बढ़ा दी रास्ते की चौड़ाई

रेवाड़ी : नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की नीति के अनुसार किसी भी पेट्रोल पंप की सीएलयू (चेंज आफ लैंड यूज) के लिए उसके सामने राजस्व रिकार्ड में कम से कम 30 फुट चौड़ा रास्ता होना अनिवार्य है, लेकिन वर्ष 2012 में धारूहेड़ा क्षेत्र के गांव आकेड़ा के निकट एक पेट्रोल पंप को केवल 22 फुट चौड़े रास्ते पर ही सीएलयू दे दी गई। आरटीआइ से अधिकारियों से मिलीभगत का यह खेल उजागर हुआ है। आरटीआइ से तथ्य जुटाने के बाद अब कोसली क्षेत्र के गांव जाहिदपुर निवासी नरेंद्र ने सीएम ¨वडो पर शिकायत भेजकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अपनी शिकायत में नरेंद्र ने उल्लेख किया है कि कांग्रेस सरकार के समय सीएलयू दिलाने के नाम पर चर्चित रहे एक नेता के दबाव पर पेट्रोल पंप को सीएलयू दे दी गई। नेता के दबाव से पहले को पंप की सीएलयू का प्रस्ताव नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के महानिदेशक कार्यालय से निरस्त होकर आ गया था।

प्रस्ताव निरस्त होने के बाद चोर दरवाजे की एक गैर कानूनी तरकीब निकाली गई। महानिदेशालय से फाइल रिजेक्ट होने के बाद पटवारी से मौके की रिपोर्ट करवाई गई। पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि राजस्व रिकार्ड में तो रास्ता 22 फुट चौड़ा ही है, लेकिन मौके पर रास्ता 35 फुट चौड़ा है। मतलब 'मौके पर' शब्द के खेल से पूरे सिस्टम का मखौल उड़ाया गया। एक ऐसी रिपोर्ट तैयार हुई, जिसमें बिना रोलर, तारकोल व रोड़ी के 35 फुट चौड़ी सड़क बना दी गई। तब के नायब तहसीलदार ने इस पर काउंटर साइन किए। हैरत की बात यह है कि जो सिस्टम फाइलों को लटकाने के लिए बदनाम रहा है, उसने एक ही दिन में बिना कमीशन व गिरदावर के मौके पर पैतीस फुट का रास्ता दर्शाने वाली रिपोर्ट तैयार कर दी।