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भोगवाद से आदर्श परिवार को चुनौती : सुरेंद्र जैन

पानीपत : बच्चों को जैसा सिखाएंगे, परिवार वैसा ही बनेगा। जिस घर में बच्चा नहीं है वो शमशान जैसा है। आदर्श परिवार को भोगवाद से चुनौती है। परिवार को बचाना है तो कर्तव्य का पालन करना होगा। उत्तरदायित्व को समझना होगा। एसडीवीएम जूनियर विंग में रविवार को राष्ट्र सेविका समिति की तरफ से आयोजित कुटुंब प्रबोधन कार्यक्रम में यह बात विश्व हिंदू परिषद् के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने कही।

उन्होंने कहा कि कल-आज-कल का सिद्धांत परिवार पर लागू है। भारतीय संस्कृति में वृद्धाश्रम की कोई जगह नहीं है। माता पिता को वृद्धाश्रम में भेजने की नौबत न आने दें। परिवार अधिकार से नहीं कर्तव्य से चलता है। परिवार का हर सदस्य कर्तव्य का पालन करता है। कर्तव्य समझ कर पालन करेगा तो आनंद आता है। बोझ नहीं लगता है। कर्तव्य भाव होगा तो अधिकार अपने आप मिलेगा। परिवार की परंपरा है कि संस्कारों को जो आगे बढ़ाया वही सजीव परिवार है।

प्रसन्नचित्त होकर आनंद में बैठें। सजीव परिवार का यही लक्ष्य है। जो जैसा करेगा वैसा ही भरेगा। परिवार में जैसा रेस्पिी तैयार करेंगे वैसा ही खाएंगे। पैसा कमना घमंड का विषय नहीं रहा। परिवार को चलाना है। ये पैसा मेरा नहीं परिवार का है। परिवार में अहम नहीं चलेगा।