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वास्‍तव में बड़ी धाकड़ हैं ये बेटियां, 20 में से 16 पर इनका कब्‍जा

हादुरगढ़, [प्रदीप भारद्वाज]। भारत ही नहीं दुनिया में कहीं सामाजिक बदलाव की कहानी देखनी है तो हरियाणा के अखाड़ों में चले आइए। ये अखाड़े केवल खेलों में नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता के वाहक बन गए हैं। यहां से निकलीं हरियाणा की धाकड़ बेटियां छा रही हैं। यही कारण है कि राष्‍ट्रमंडल कुश्‍ती चैंपियनशिप के लिए 20 सदस्‍यीय भारतीय म‍हिला कुश्‍ती टीम में ह‍रियाणा की 16 बेटियां हैं। इनमें चार फाैगाट बहनें और साक्षी मलिक भी शामिल हैं। यह हरियाणा में महिलाओं के सशक्‍तीकरण का शानदार उदाहरण है। राष्‍ट्रमंडल कुश्‍ती चैंपियनशिप14 से 17 दिसंबर तक दक्षिण अफ्रीका में होगी।गांव-गांव में ऐसे अखाड़े व अकादमियों में बेटियां दिग्‍गजों को धूल चटाती दिखती हैं। बदलाव की कहानी इतनी आसान नहीं थी। गांव और समाज की बंदिशों की बाधाएं तोड़कर ये बेटियां गर्दिशों की माटी में खेली हैं और फिर विश्व पटल पर चमकी हैं। इसका ही परिणाम है कि एक के बाद एक हरियाणा की लड़कियां दुनिया में अपनी पहचान बनाने को तत्‍पर हैं।बेशक ही आज साक्षी मलिक, फौगाट बहनों के अलावा कई और नाम कुश्ती के क्षितिज का सितारा बनी हों, मगर उन महिला पहलवानों की भूमिका और भी ज्यादा अहम मानी जाएगी, जो सामाजिक बंदिशों को तोड़कर इस शुरूआत की अगुवा बनीं। करीब दो दशक पहले तक तो प्रदेश में महिला कुश्ती की सोच रखने वाले गिने-चुने शख्स ही थे, लेकिन आज स्पेशल महिला अखाड़ों और कुश्ती अकादमी बढ़ती संख्या बहुत कुछ कह रही है।

गीता और बबीता फौगाट के अलावा सोनिका कालीरमण, किरण सिहाग, नेहा राठी ने भी हरियाणा में कुश्ती से पूरे नारी समाज को कामयाबी की राह दिखाई। यह वह दौर था जब गांवों में बटियों के लिए घर से निकलने की ही इजाजत नहीं थी। लेकिन, यह हर चुनौती को साहस से धराशायी करती आगे बढ़ती गईं।

कुश्ती के सरताज ने करवाया आगाज

कहते हैं कि कोई भी अच्छी शुरुआत करनी हो तो वह खुद से करें। निसंदेह ऐसी सोच किसी गुरु की ही हो सकती है। ऐसे ही गुरु रहे पद्मश्री मा. चंदगीराम। उनका अखाड़ा तो दिल्ली में है, लेकिन उन्‍होंने हरियाणा के पहलवानाें को राह दिखाई। मा. चंदगीराम मूलत रूप से हिसार जिले के गांव सिसाय के निवासी थे। प्रदेश में महिला कुश्ती को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।