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साइबर सिटी के तबला धुरंधरों ने स्पेन में लहराया परचम

आइटी क्षेत्र में अपनी धाक जमा चुकी साइबर सिटी, सांस्कृतिक विरासत को भी बखूबी संभाल रही है। यह बात एक बार फिर से सच साबित की है, शहर के छह तबला वादक बच्चों ने। सुशांत लोक स्थित ब्रह्मनाद तबला संस्थान के छह छोटे उस्तादों ने स्पेन में तबले पर अपनी अंगुलियों और हाथ की थाप का जादू बिखेरा। स्पेन के वैलोडॉलिड शहर में 26 नवंबर तक आयोजित छह दिवसीय परफार्मिंग आ‌र्ट्स के सातवें वैश्विक सांस्कृतिक ओलंपियाड में बच्चों ने विभिन्न श्रेणी में जीत हासिल किया है। शिष्यों की उपलब्धि को लेकर तबला गुरु सार्थक कुमार का कहना है कि विश्व स्तर पर खिताब जीत कर बच्चों ने अपनी व उनकी मेहनत को सफल किया है। प्रतिस्पर्धा में ग्यारह वर्षीय आयुष सवदेकर (गोल्ड), 15 वर्षीय रित्विक गुप्ता (गोल्ड), ग्यारह वर्षीय दर्श पुरी (सिल्वर), 15 वर्षीय साईं शुभम (कांस्य), 15 वर्षीय रोहित गुप्ता व इनायसा दस्सानी (मेधावी पुरस्कार) ने अपनी प्रतिभा से विश्वपटल पर देश का नाम रोशन किया है।

इन टीमों को किया पराजित: पुणे में हुई राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिता में चुनाव के बाद भारत से बांसुरी वादन, सितार, गिटार जैसी विभिन्न विधाओं के तीन सौ कलाकारों का दल स्पेन गया था। इसमें तबला के लिए गई चार टीमों में शहर के नन्हे उस्तादों ने पश्चिम बंगाल, गुजरात व असम की टीम को पछाड़ा। यही नहीं इन्होंने श्रीलंका, दुबई व यूरोपीय देशों की अन्य टीमों को भी तबला प्रतिस्पर्धा में करारी शिकस्त दी।

मैं प्रतिदिन दो घंटे अभ्यास करता हूं और सप्ताह में चार दिन गुरुजी के पास सीखने जाता हूं। फुर्सत के क्षणों में मुझे कार्टून फिल्में देखना व पें¨टग्स बनाना पसंद है। मैं इंजीनियर बनाना चाहता हूं। पढ़ाई को प्राथमिकता देता हूं पर तबला भी मेरे लिए कम अहम नहीं है। आगे भी पढ़ाई और तबला के बीच संतुलन बनाते हुए दोनों को जारी रखूंगा।

- आयुष सवदेकर

प्रतिदिन तबला के लिए कम से कम एक घंटा समय निकालता हूं। मैं अर्थशास्त्री बनना चाहता हूं। पढ़ाई के साथ-साथ तबला बजाना मुझे बहुत पसंद है। तबले की और बारीकियां सीखना चाहता हूं ताकि आगे भी प्रतिस्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिले।

- रित्विक गुप्ता

मैं वास्तुविद बनाना चाहता हूं। साथ ही संगीत व तबला वादन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाना चाहता हूं। पहले पहल तबला मेरे लिए शौकिया ही था पर अब यह मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। विश्व स्तर पर खिताब जीतने से हौसला बढ़ा है।

- दर्श पुरी

मुझे तबला बजाना बहुत अच्छा लगता है। गुरुजी के अलावा खुद से भी सीखने का प्रयास करता रहता हूं। पढ़ाई में मुझे गणित और विज्ञान बहुत पसंद है। अभिभावक और गुरुजी काफी सहयोग करते हैं। आगे भी पढ़ाई के साथ तबला वादन जारी रखूंगा।

- रोहित गुप्ता

शुरुआत में पढ़ाई और तबला वादन के बीच संतुलन बनाना थोड़ा कठिन था। लेकिन, अब यह दिनचर्या का हिस्सा है और सहजता से दोनों के बीच सामंजस्य बिठा लेती हूं। विज्ञान में मेरी रुचि है। आगे ऐसे क्षेत्र का चुनाव करना चाहती हूं जिसमें तबले के लिए भी समय निकाल पाऊं।

-इनायसा दस्सानी

आगे चलकर मैं कॉर्पोरेट लॉयर बनना चाहता हूं। लेकिन, तबला वादन का मेरे जीवन में अहम स्थान है। यह मेरे लिए साधना की तरह है। तबला वादन मेरी ¨जदगी में कई बदलाव लेकर आया है। देश और देश के बाहर पुरस्कार जीतना गौरवपूर्ण है।