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MPHW का हल्ला बोल, स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ खोला मोर्चा

अंबाला : शुक्रवार को पूरे प्रदेश से अंबाला में जुटे बहु उद्देशीय स्वास्थ्य कर्मियों (एमपीएचडब्ल्यू) ने अपनी मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के खिलाफ हल्ला बोल प्रदर्शन किया। सुबह से ही अंबाला के इंदिरा पार्क में जुटना शुरू हुए एमपीएचडब्ल्यू को सर्व कर्मचारी संघ समर्थन दे रहा था। पार्क में करीब सवा चार घंटे तक वक्ताओं ने प्रदेश सरकार विशेषकर स्वास्थ्य मंत्री को अपने निशाने पर लिया। करीब सवा दो बजे पार्क से जलूस की शक्ल में रवाना हुए। स्वास्थ्य मंत्री के आवास तक करीब डेढ़ किलोमीटर तक स्वास्थ्य मंत्री के पुतले की शव यात्रा निकाली। स्वास्थ्य मंत्री की आवासीय कालोनी पर खूब नारेबाजी की। यह धरना स्वास्थ्य मंत्री द्वारा एमपीएचडब्ल्यू व सर्वकर्मचारी संघ के नेताओं को बातचीत के लिए समय तय करने के बाद ही संपन्न हुआ। हालांकि, एकबारगी बातचीत बिगड़ती भी दिखी। इसके बावजूद एमपीएचडब्ल्यू ने साफ चेताया कि स्वास्थ्य मंत्री के आवास के उनके कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित किया है और अब आंदोलन की दिशा 19 दिसंबर को दोपहर दो बजे स्वास्थ्य मंत्री व अफसरों से होने वाली आगामी बातचीत पर ही तय करेगी।

वहीं, एमपीएचडब्ल्यू के इस प्रदर्शन को लेकर पुलिस प्रशासन के पसीने छूटे रहे। पुलिस-प्रशासन को खुद भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि इतनी तादाद में एमपीएचडब्ल्यू अंबाला में जुटेंगे। जिसको देखते हुए छावनी के इंदिरा पार्क पर खुद डीएसपी सुरेश कौशिक व छावनी थाना के प्रभारी पार्क पर ही डटे रहे। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री की कोठी पर एसडीएम सुभाष चंद्र सिहाग व तहसीलदार राजेश पूनिया बंदोबस्त संभाले थे। जब एमपीएचडब्ल्यू व सर्वकर्मचारी संघ के कर्मचारी स्वास्थ्य मंत्री के आवास पर पहुंचे तो यहां कालोनी के सभी गेटों को बंद कर दिया गया। वहीं, मुख्य गेट पर बेरीकैड्स लगा दिए गए। इसके बावजूद कर्मी बैरीकेड्स पर चढ़ गए। पुलिस ने पुतले की अर्थी को ठिकाने लगाने चाहा तो कर्मी नहीं माने। अलबत्ता, कर्मियों की तादाद देखते हुए पुलिस ने नरमी ही बरती।इंदिरा पार्क में सुबह 10 बजे से दोपहर करीब डेढ़ बजे तक विभिन्न जिलों से एमपीएचडब्ल्यू पार्क में पहुंच रहे थे। अपने अपने जिले के बैनर व मांगों से जुड़ी तख्तियां हाथ में लेकर धरना स्थल तक नारेबाजी करते हुए पहुंचे। वहीं, धरना स्थल पर बहु उद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन की प्रदेशाध्यक्ष ओमपति कादियान, राज्य महासचिव हरिओम, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष लाजवंती, राज्य उप प्रधान प्रमोद बाला, पाल कौर, सर्व कर्मचारी संघ के आडिटर सतीश सेठी व सभी जिला प्रधानों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार को जमकर कोसा। बाद में बाजारों से होते हुए स्वास्थ्य मंत्री के आवास तक पहुंचे।

इन मांगों को लेकर रहा गतिरोध

बहु उद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन ने 25 अगस्त 2015 को स्वास्थ्य मंत्री से हुई बातचीत के बाद मानी मांगों को लागू करने, एमपीएचडब्ल्यू, एमपीएचएस व एसएमआई के पदों को तकनीकी घोषित करने, पंजाब के समान वेतनमान लागू करने, आरसीएच के तहत कार्यरत एएनएम व एमपीएचडब्ल्यू को 2 वर्ष के अनुभव पर नियमित करने, नियमित किए जाने तक समान काम समान वेतन लागू करने, कैशलेस मेडिकल आदि सहित कुल 21 मांगों पर गतिरोध है।

स्वास्थ्य मंत्री से प्रतिनिधि मंडल की बिगड़ते बिगड़ते बनी बात

प्रतिनिधिमंडल से स्वास्थ्य मंत्री का कहना था कि वह दो दिनों में बता देंगे कि उन्हें बातचीत के लिए कब बुलाएंगे। जबकि प्रतिनिधिमंडल तुरंत तिथि निश्चित करने की बात कर रहा था। विज बोले,कि वह एकदम तय नहीं कर पाएंगे। अफसर भी बैठक में रहेंगे तो देखना होगा कि वह कब मौजूद रहेंगे। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल से कुछ सदस्य भड़कते हुए बोले कि कर्मचारी तब तक कालोनी से नहीं उठेंगे जब बातचीत का वक्त तय नहीं होता। स्वास्थ्य मंत्री ने भी कह दिया कि वह चाहे तो चले जाएं और जब मर्जी तक धरना दें। कर्मी इस दौरान हक्के-बक्के थे। हालांकि, कुछ कर्मियों की सूझ बूझ से यह गतिरोध टल गया और कर्मियों को समय निश्चित कर दिया गया।