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नगर निगम में शामिल होने के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे ग्रामीण

राई : गांवों को नगर निगम में शामिल किए जाने का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने एक बार फिर आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। गांवों को नगर निगम में शामिल करने के खिलाफ अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। इसको लेकर रविवार को राई गांव में विभिन्न गांवों के प्रतिनिधियों ने बैठक की और सहमति से हाईकोर्ट जाने का फैसला लिया। बैठक की अध्यक्षता पंचगामा कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र ¨सह कटारिया ने की, जबकि नगर निगम विरोधी मंच के प्रधान नफे ¨सह ने बैठक का संचालन किया।

बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव की शामलात जमीन पर मालिकाना हक गांव वालों का है। अगर निगम उस जमीन को अपने पास रखना चाहता है तो ग्रामीणों को उसका मुआवजा देना होगा। इसके अलावा निगम में आने वाले गांव की अधिग्रहित हुई जमीन के पैसे पर भी ग्रामीणों का हक है। राम राज सेवा समिति के प्रधान जयबीर हुड्डा ने बताया कि नगर निगम में 26 गांवो की 3,748 एकड़ जमीन गई है जो अरबों रुपये की है। अकेले जाट जोशी ग्राम पंचायत के खाते से 14 करोड़ 76 लाख रुपये तीन साल पहले निगम के खाते में गए थे।

अब तक ब्याज लगाकर 18 करोड़ से ऊपर हो चुके हैं। वहीं, 10 एकड़ जमीन जो बहालगढ़ में बस अड्डा बनाने के लिए दी गई है, उसके लिए भी परिवहन विभाग निगम को करोड़ों रुपये मुआवजा देगा। लेकिन, करोड़ों रुपये निगम में जाने के बाद भी उनके गांवों का कोई विकास नहीं हो रहा है। इसके विरोध में हाईकोर्ट जाने का निर्णय लिया गया है। यही नहीं अब इसको लेकर व्यापक आंदोलन भी चलाया जाएगा, जिसको लेकर शीघ्र ही निगम में शामिल हुए गांवों के लोगों को लेकर एक महापंचायत होगी, जिसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।