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वैष्णवी मर्डर: किशोर की उम्र पर बवाल, यूपी के सर्टिफिकेट खोल सकते हैं राज

अम्बाला.वैष्णवी हत्याकांड को अंजाम देने वाले किशोर की उम्र को लेकर बवाल पैदा हो गया है। वह बालिग है या नहीं, इसे लेकर जांच टीमें भी उलझी हुई हैं। मगर इस राज से वह कड़ी जरूर पर्दा उठा सकती है, जो किशोर की पिछली जिंदगी से जुड़ी है। ऐसे में परिवार काे बोर्ड के समक्ष एक याचिका दायर करनी होगी।


इसके बाद बोर्ड किशोर के यूपी से जुड़े सर्टिफिकेट मंगवाकर उसके बालिग या नाबालिग होने पर असली मोहर लगाएगा। मगर इससे पहले बोर्ड भी स्कूल सर्टिफिकेट को ही सच मानकर आगामी कार्रवाई पूरी करेगा।


गांव बोह में रहने वाली पांच वर्षीय वैष्णवी का कुछ दिन पहले खेलते-खेलते अपहरण हो गया था। जिसका काफी देर बाद पता चला। तभी एक पड़ोसी के पास यूपी नंबर से कॉल आया और उसने फोन पर वैष्णवी को छोड़ने की एवज में 20 लाख की फिरौती मांगी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। काफी देर बाद पुलिस ने उस किशोर तक पहुंची, जिसने वैष्णवी का अपहरण किया था।


जब पूछताछ हुई तो पुलिस के हाथ वैष्णवी का शव लगा। क्योंकि किशोर पकड़े जाने के डर से उसकी पानी के टब में डुबोकर हत्या कर चुका था। लिहाजा पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जांच शुरू कर दी थी। पुलिस जांच में पाया गया कि वारदात को अंजाम देने वाला किशोर नाबालिग है और वह एक नामी स्कूल की 11वीं कक्षा में पढ़ रहा है। इधर, परिवार का कहना है कि वैष्णवी की निर्मम हत्या करने वाला किशोर बालिग है। उसके आधार कार्ड पर वर्ष 2001 का जन्म है तो स्कूल सर्टिफिकेट में वर्ष 2002 दर्ज है। इसी आधार पर परिवार ने पुलिस से किशोर के खिलाफ बालिग होने के तहत कार्रवाई की मांग की है, जिसे लेकर परिवार रोष मार्च भी निकाल चुका है। उनका कहना है कि किशोर ने जो अपराध किया है, वह जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है और उसके लिए किसी तरह का रहम नहीं होना चाहिए। वैष्णवी की मम्मी ने मांग की है कि अपराधी की उम्र न देखकर अपराध के आधार पर सजा दी जाए।

कानूनी पचड़े में उलझी जांच
किसी भी किशोर की उम्र का पता लगाने के लिए पुलिस सबसे पहले स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट को देखती है। अगर वह न हो तो पुलिस जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाती है। अगर वह भी नहीं मिलता तो कमेटी या अन्य किसी सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े तथ्य को आधार मानकर कार्रवाई करती है। ये सब न मिलने पर ओसिफिकेशन टेस्ट करवाया जाता है। जांच उस पैमाने पर पहुंच जाती, लेकिन इससे पहले यूपी से जुड़े सर्टिफिकेट को चैक किया जा सकता है।

अगर परिवार बोर्ड के पास अर्जी लगाकर किशोर की उम्र को चैलेंज करता है तो बोर्ड किशोर के यूपी से जुड़े साक्ष्य मंगवा सकता है। उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जा सकती है।
अमित जैन, सदस्य, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड अम्बाला।