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संस्कारों की कलम से ज्ञान की परीक्षा

 कैथल : दैनिक जागरण की तरफ से एसएस बाल सदन स्कूल व बीआरडीएम स्कूल में संस्कारशाला की परीक्षा आयोजित की। दोनों स्कूलों में आयोजित हुई परीक्षा में करीब 600 विद्यार्थियों ने भाग लिया। परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। स्कूल स्टाफ ने भी इस परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों को जानकारी दी। कहा कि संस्कार मनुष्य को अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाता है। व्यक्ति में जैसे संस्कार होंगे, उसकी प्रवृत्ति भी वैसी होगी। भारत का भविष्य संस्कारवान बने। उसमें नैतिक मूल्यों का समावेश हो सके। वहीं परीक्षा में बैठे विद्यार्थी रवि व कमल ने बताया कि परीक्षा देने से यह सीख मिली कि हमें अच्छा आचरण करना चाहिए। जो जैसा बोता है वैसा काटता है। जीवन में हम सभी को अच्छा कर्म करना चाहिए।

एसएसबाल सदन में 359 विद्यार्थियों ने दी परीक्षा

शहर के चंदाना गेट स्थित एसएस बाल सदन स्कूल में 359 बच्चों ने संस्कारशाला की परीक्षा दी। परीक्षा को लेकर विद्यार्थी उत्साहित दिखे। विद्यार्थियों ने अच्छे से प्रश्नों का हल किया। स्कूल की प्रि¨सपल राजरानी गर्ग ने बताया कि परीक्षा में नैतिक जीवन व संस्कार से संबंधित प्रश्न पूछे गए थे। कोर्स से इतर परीक्षा देने में बच्चों को अच्छा लगा। यह परीक्षा बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक है। समाज से जुडे़ प्रश्नों के साथ ही सामान्य अध्ययन के प्रश्न पूछे जाने से बच्चों का बौद्धिक विकास होगा। हर साल होने वाली संस्कारशाला की परीक्षा में उनके स्कूल के बच्चे शामिल होते हैं। संस्कार की परीक्षा में शामिल होने के लिए बच्चे लालायित रहते हैं।

बीआरडीएम में 250 विद्यार्थियों ने दी परीक्षा

शहर के जाखौली अड्डा स्थित बीआरडीएम स्कूल में भी दैनिक जागरण की तरफ से संस्कारशाला की परीक्षा आयोजित की। इस परीक्षा में 250 के करीब विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों ने दैनिक जागरण समाचार पत्र पढ़कर अच्छी तैयारी की हुई थी। विद्यार्थियों के साथ-साथ स्टाफ भी उत्साहित दिखा। स्कूल प्रि¨सपल वरूण जैन ने बताया कि दैनिक जागरण हर साल इस प्रकार की परीक्षा का आयोजन करता है। इस परीक्षा में उनके स्कूल के विद्यार्थी हर साल भाग लेते हैं। इस बार भी परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों ने अच्छी तैयारी की। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे संस्कार हैं जो हमें मालूम ही नहीं थे। परीक्षा देने के बाद ढेरों जानकारियां बच्चों को हासिल हुई है। जैसे की हमें दूसरों के साथ अच्छा आचरण करना चाहिए। जब हम अच्छा आचरण प्रस्तुत करते हैं, तो सभी हमें स्नेह देते हैं। इससे आत्मीय खुशी मिलती है। संस्कार ही हमें दूसरों से अलग श्रेणी में खड़ा करते हैं। हम जैसा आचरण करते हैं ठीक उसी प्रकार लोग हमसे व्यवहार करते हैं।