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मिड-डे मील को लेकर संदेह के घेरे में जिले के 85 प्रतिशत स्कूल

  तावडू : नूंह जिले के 15 प्रतिशत बच्चों की ही मिड-डे मील रिपोर्ट मेसेज द्वारा निदेशालय प्रेषित हो रही है। 85 प्रतिशत स्कूलों द्वारा इस माध्यम को न अपनाना संदेह के घेरे में अवश्य लाता है। अतिरिक्त निदेशक(प्रशासन), मौलिक शिक्षा ने इस संदर्भ में डीईईओ नूंह से बात की है। उन्होंने प्रतिदिन रिपोर्ट न देने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की बात कही है। वहीं डीईईओ ने इस संदर्भ में समस्त बीईओ को ऐसे स्कूल मुखिया व मिड डे मील इंचार्जों से स्पष्टीकरण मांगने के आदेश दिए हैं।

बता दें कि कुछ समय पूर्व सरकार ने सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने को लेकर ऑनलाइन प्रणाली लागू की। इस प्रणाली के तहत स्कूल मुखिया व मिड-डे मील इंचार्ज को विद्यालय शिक्षा निदेशालय में सर्वप्रथम अपने मोबाइल का रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। स्कूल में कितने बच्चे उपस्थित हैं तथा कितने बच्चों को मिड-डे मील दिया इसकी मोबाइल मेसेज से रिपोर्ट निदेशालय को प्रेषित करनी होती है। इस जिले में जनवरी 2016 से ये पैटर्न लागू है। लेकिन अभी तक केवल 15 प्रतिशत स्कूल ही प्रतिदिन ही इस रिपोर्ट को उक्त माध्यम से भेज रहे हैं। जिले के 85 प्रतिशत स्कूलों को शायद ये पारदर्शी सिस्टम रास नहीं आ रहा है। वे अन्य माध्यमों से बीईओ ऑफिस रिपोर्ट भेजते हैं। ये प्रणाली उन्हें संदेह के घेरे में अवश्य लाती है। प्रदेश मौलिक शिक्षा विभाग की अतिरिक्त निदेशक(प्रशासन) वंदना ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीईईओ नूंह से बात की। उन्होंने ऐसे स्कूल के हेडमास्टरों व मिड-डे इंचार्जों से स्पष्टीकरण लेने के आदेश दिए हैं।