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आंगनबाड़ी से मदर ग्रुप हटाने की साजिश रच रहा विभाग

यमुनानगर : महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों से मदर ग्रुप खत्म कर दिए। जबकि इसके लिए कोई लिखित आदेश जिला अधिकारियों के पास नहीं है। पहले सप्ताह में तीन दिन भोजन बनवाने का निर्णय था, जो मनमर्जी से बाद में खत्म कर दिया। यह आरोप बृहस्पतिवार को लघु सचिवालय पहुंची महिलाओं ने लगाया। दोबारा रखे जाने की मांग को लेकर तहसीलदार को जिला उपायुक्त के नाम ज्ञापन दिया।

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के बेनर तले पहुंची जिला प्रधान गीता रानी तथा सचिव संतोष कुमारी ने बताया कि वह सभी जरूरतमंद महिलाएं हैं। वह आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए राशन तैयार करती हैं, इसकी एवज में उनको एक रुपया 60 पैसे प्रति बच्चा प्रतिदिन मिलता है। इसमें से उनको ईंधन, सब्जी, दाल, दलिया पिसाई पर खर्च करना होता है। पहले हम पूरे छह दिन यह कार्य करती थी, लेकिन पीछे सरकार ने आदेश कर दिए महिलाएं केवल तीन दिन काम करेगी। बाकि दिन हैल्पर भोजन बनाएगी। इससे महकमे के अधिकारियों ने मनमर्जी कर उनको काम से हटा दिया। भोजन तैयार करने तथा सामग्री लाने की जिम्मेदारी मौखिक रूप से हेल्परों की लगा दी। जबकि हिदायत उनकी खाना पकाने की है।

इससे हिसाब करने की समस्या भी हो जाती है। इतना ही नहीं सभी सीडीपीओ ने आंगनबाड़ी वर्करों को मौखिक आदेश दिए हैं कि मदर ग्रुप से खाना नहीं बनवाया जाए। इसलिए कार्यकर्ता उनको केंद्र में आने नहीं देती। केंद्रों में काम करने के बाद उनको कुछ पैसे मिलते थे,जिससे थोड़ा बहुत खर्च चलता था, वह भी बंद हो गया। उनकी मांग है कि उनको दोबारा काम पर रखा जाए। जिला परियोजना अधिकारी की मनमर्जी पर रोक लगाई जाए