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झज्जर मंडी में धान पहुंचने से खाली बैठे आढ़ती-मजदूर, बेरी मंडी आवक से गुलजार

झज्जर मंडी में बाजरे की परचेज के बाद अब आढ़तियों के पास कोई काम नहीं है। जबकि इन दिनों में धान का सीजन है। झज्जर मंडी में जहां धान देखने को नहीं मिल पा रहा है। वहीं बेरी की अनाज मंडी अब इसी से गुलजार बनी है। बेरी की इस मंडी में 1121 की खरीद जोरों पर चल रही है। पीआर की खरीद लगभग बंद हो गई। 

जिले में करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर बनी दोनों मंडियों में इस प्रकार की स्थिति के कारण अब इस बात पर भी चिंतन शुरू हो गया है कि झज्जर मंडी को सभी फसल सीजनों की मंडी कैसे बनाया जाए। झज्जर मंडी के बारे में अभी तक यहीं धारण बनी है कि यहां पर केवल गेहूं खरीद के दौरान काम होता है। पिछले दो सालों से यहां बाजरे की खरीद भी हुई। बाजरे की खरीद के मामले में तो यहां की मंडी एक रिकाॅर्ड बनाया है। जिले की इस मंडी में जितना बाजरा सरकार की ओर से खरीदा गया, उतना बाजरा प्रदेश की किसी मंडी में नहीं खरीदा गया। यह आंकड़ा क्षेत्र के किसानों आढ़तियों के लिए बड़ी बात है। 

पूंजी फंसने का भय आढ़तियों को खरीद में नहीं दे रहा हौसला 

झज्जरमंडी में धान आने का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से झज्जर की मंडी को परचेज के लिए अलॉट नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर आढ़तियों की ओर से भी इस मामले में अधिक रूचि नहीं दिखाई जा रही है, ताकि ये निजी मिल के लिए काम करेंगे। पूंजी फंसने के भय के कारण आढ़तियों का हौसला नहीं बन पा रहा है। आढ़तियों का कहना है कि धान के लिए अच्छा वातावरण होने के कारण झज्जर का धान बेरी या फिर रोहतक मंडी पहुंच रहा है, जो झज्जर के किसानों और आढ़ती दोनों के लिए ही घाटे का सौदा बन रहा है।